एंजेल टैक्स

स्टार्टअप्स के लिए एंजेल टैक्स क्या है ? स्टार्टअप क्यों हैं इससे परेशान

स्टार्टअप्स के लिए एंजेल टैक्स

स्टार्टअप्स के लिए एंजेल टैक्स स्टार्टअप निवेश पर लगाया जाने वाला एक टैक्स है। जिसे 2012 इस क्षेत्र में मनी लॉन्डरिंग रोकने के लिए प्रस्तावित किया गया था।

अब यह टैक्स एक जिन्न के समान बाहर आ रहा है। पिछले सप्ताहों के दौरान कई स्टार्टअप्स को इस सन्दर्भ में आयकर विभाग के नोटिसेस प्राप्त हुए हैं। इन नोटिसेस में उनसे उनके द्वारा चुकाए गए एंजेल टैक्स का ब्यौरा माँगा गया है। कुछ मामलों में एंजेल टैक्स न चुकाने के लिए जुर्माना भी लगाया गया है।

वैसे यह मुद्दा स्टार्टअप वर्ल्ड कोई पहली बार नहीं उठ रहा है।  स्टार्टअप्स एवं इस क्षेत्र में निवेश करने वाले शुरू से ही एंजेल टैक्स का विरोध कर रहे हैं।  पिछले बजट के दौरान भी वे उम्मीद कर रहे थे कि एंजेल टैक्स हटा लिया जाएगा। लेकिन ऐसा हुआ नहीं।

आईये थोड़ा समझें, कि क्या है ये एंजेल टैक्स ?

एंजेल टैक्स 30% की दर से किसी बाहरी निवेशक द्वारा स्टार्टअप में निवेश किये गए धन पर लगाया जाता है। लेकिन यह उसी स्थिति में लगाया जाता है, जबकि स्टार्टअप का मूल्यांकन उचित बाजार मूल्य से बढ़कर किया गया हो। ऐसी स्थिति में इस निवेश को कम्पनी की आय के रूप में आँका जाता है। एंजेल टैक्स को 2012 में मनी लॉन्ड्रिंग रोकने के लिए प्रस्तावित किया गया था।

एंजेल टैक्स में समस्या क्या है?

स्टार्टअप क्षेत्र में मूल्यांकन एक बहुत बड़ी समस्या है। किसी भी स्टार्टअप के ‘उचित बाजार मूल्य’ को मापने का कोई निश्चित या उद्देश्यपूर्ण तरीका नहीं है। निवेशक स्टार्टअप आईडिया और उसकी व्यापार क्षमता का एक वैचारिक आंकलन करता है। और इसी के आधार पर वह स्टार्टअप के लिए एक धनराशि का भुगतान एंजेल फंडिंग स्टेज में करता है। जबकि आयकर अधिकारी स्टार्टअप्स का मूल्यांकन शुद्ध संपत्ति मूल्य (net asset value) के आधार पर करने लगते हैं। यहीं से स्टार्टअप्स के लिए समस्या खड़ी हो जाती है। अधिकतर स्टार्टअप्स इस अधिक वैल्यूएशन का औचित्य साबित नहीं कर पाते हैं।

24 मई, 2018 को एक अधिसूचना जारी कर सीबीडीटी ने इस संदर्भ में कुछ छूट प्रदान की थीं। डीआईपीपी द्वारा निर्दिष्ट नियमों और शर्तों को पूरा करने पर एंजेल टैक्स क्लॉज में यह छूट दी गई थी। हालांकि, इस छूट को प्राप्त करने में भी स्टार्टअप विभिन्न प्रकार की चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।

आयकर विभाग द्वारा जारी नोटिसेस के सन्दर्भ में

आयकर विभाग द्वारा नोटिस भेजने के कई कारणों में से एक, असल स्टार्टअप्स को बोगस से अलग करना है। ये नोटिसेस अधिकतर आयकर अधिनियम सेक्शन 56 (2) (viib) के अंतर्गत भेजे गए हैं। जिसमें अन्य स्रोतों से हुई आय का मूल्यांकन किया जाता है। इस खंड में कहा गया है कि कंपनी द्वारा प्राप्त अतिरिक्त प्रतिफल की गणना आय के रूप में होगी। यदि कम्पनी किसी निवासी को शेयर जारी करती है और उन शेयर्स का भाव उचित बाजार मूल्य से अधिक है। तो इसकी गणना कम्पनी को हुई अतिरक्त आय के रूप में की जाएगी। यह खंड वेंचर कैपिटल कम्पनीज एवं वेंचर कैपिटल फण्ड्स के लिए अमान्य है। सरकार द्वारा अधिसूचित व्यक्तियों एवं वर्गों के लिए भी यह खंड अमान्य है।

आयकर अधिनियम की धारा 142 (1) के तहत नोटिस। एक निर्धारण अधिकारी इस खंड के तहत एक नोटिस भेजता है ताकि जांच के मूल्यांकन के लिए आवश्यक अतिरिक्त दस्तावेजों उपलब्ध हो सकें। निर्धारण अधिकारी को यह मूल्यांकन आंकलन वर्ष के 21 महीनों के भीतर अथवा वित्त वर्ष के 33 महीनों के भीतर पूरा करना होता है।

इस सन्दर्भ में सरकार का रुख

इसी वर्ष राजस्व विभाग ने एक अधिसूचना जारी कर अधिकारियों को निर्देश दिया था कि पंजीकृत स्टार्टअप्स के खिलाफ एंजेल टैक्स की वसूली पर कठोर कदम न उठाए जायें। लेकिन गैर पंजीकृत स्टार्टअप्स जिन्होंने पहले ही एंजेल इनवेस्टमेंट पा लिया है, वे अभी भी इनकम टैक्स अथॉरिटीज के रडार पर हैं।

सीबीडीटी ने इस सन्दर्भ में अभी हाल ही में एक बयान जारी किया है। बयान में कहा गया है कि इस सन्दर्भ में कर वसूली से संबंधित कोई भी कठोर कार्रवाई तब तक नहीं की जाएगी। जब तक कि सरकार द्वारा गठित एक विशेषज्ञ पैनल इस मुद्दे का समाधान नहीं ढूंढ़ लेता। सीबीडीटी ने यह स्वीकारा है कि स्टार्टअप देश में बहुत सारे नवाचार लाने जा रहे हैं, जिसके लिए हर संभव तरीके से उनका समर्थन किया जाना चाहिए।

स्टार्टअप्स की मान्यता के लिए एक नया ढांचा तैयार करने के लिए आईआईटी एवं आईआईएम के प्रख्यात विशेषज्ञों का एक पैनल जल्द ही गठित किया जाएगा।


 

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स्रोत : दन्यूज़मिनट। 

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