केबल टीवी नेटवर्क के माध्यम से ब्रॉडबैंड सेवाओं के प्रावधान पर सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय का सम्मेलन

  • केबल टीवी नेटवर्क के जरिए ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी से भारत में फिक्स्ड लाइन नेटवर्क का बुनियादी ढांचा सुदृढ़ होगा: अमित खरे, सचिव, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय

नई दिल्ली।
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने केबल टीवी नेटवर्क के माध्यम से ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी के प्रावधान से संबंधित मामलों पर चर्चा करने के लिए आज एक सम्मेलन का आयोजन किया। इस सम्मेलन में देश भर के प्रमुख मल्टी सिस्टम ऑपरेटर-एमएसओ ने बड़े पैमाने पर भाग लिया।

इस अवसर पर ट्राई के अध्यक्ष आर.एस. शर्मा ने बताया कि वर्तमान में भारत में फिक्स्ड लाइन नेटवर्क के माध्यम से केवल 7 प्रतिशत इंटरनेट कनेक्टिविटी है, जबकि इसका वैश्विक औसत लगभग 46 प्रतिशत है। पहले से स्थापित केबल टीवी नेटवर्क्स के माध्यम से ब्रॉडबैंड सेवाओं का प्रावधान करने से फिक्स्ड लाइन नेटवर्क से जुड़े बुनियादी ढांचे को मजबूत बनाने में व्यापक मदद मिलेगी। दूरसंचार विभाग (डीओटी) को शुल्क के रूप में 8 प्रतिशत समायोजित सकल राजस्व (एजीआर) के भुगतान के मामले पर- कि क्या इसका भुगतान केवल ब्रॉडबैंड सेवाओं के संदर्भ में ही किया जाना चाहिए या दोनों तरह के कारोबार में समग्र सृजित राजस्व पर किया जाना चाहिए- इस पर ट्राई के अध्यक्ष ने दक्षिण कोरिया का उदाहरण दिया, जिसने एजीआर से छूट दे रखी है और वहां इस समय फिक्स्ड लाइन नेटवर्क के जरिए 93 प्रतिशत इंटरनेट कनेक्टिविटी है।

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय में सचिव अमित खरे ने बताया कि वर्तमान में भारत में लगभग 30 करोड़ परिवारों में से करीब 19 करोड़ परिवारों के पास टीवी कनेक्शन हैं, इनमें से लगभग 10 करोड़ परिवारों को केबल टीवी नेटवर्क के जरिए टीवी कनेक्शन उपलब्ध है। इस तरह विशाल केबल टीवी नेटवर्क के जरिए इंटरनेट कनेक्टिविटी का प्रावधान तत्काल उपलब्ध है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकार की समस्त नीतियां, उन्हें कार्यान्वित करने वालों- जो इस मामले में केबल टीवी ऑपरेटर हैं- की चिंताओं को ध्यान में रखकर ही बनाई जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि यही सुनिश्चित करने के लिए यह सम्मेलन आयोजित किया गया है।

दोनों सेवाओं का संयुक्त प्रावधान करने से संबंधित तकनीकी बदलावों के बारे में बेसिल के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक जॉर्ज कुरूविला की संक्षिप्त प्रस्तुति के बाद एमएसओ के प्रतिनिधियों को अपनी बात रखने का अवसर प्रदान किया गया। प्रतिभागियों ने इस प्रस्ताव के प्रति उत्सुकता व्यक्त की, लेकिन साथ ही अपने समक्ष आने वाले विविध मसलों और व्यवहारिक कठिनाइयों का भी विस्तार से उल्लेख किया।

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय में सचिव अमित खरे ने इस दौरान उठाए गए लाइसेंसिंग, राइट ऑफ वे, प्रौद्योगिकी और एजीआर से संबंधित मामलों को स्वीकार किया। उन्होंने एमएसओ को आश्वासन दिया कि केबल टीवी नेटवर्क के जरिए ब्रॉडबैंड सेवाओं के प्रावधान को सफल बनाने के लिए सरकार द्वारा एमएसओ पर किसी खास तरह की प्रौद्योगिकी थोपकर उसे अपनाने को नहीं कहा जाएगा। एजीआर के मामले पर उन्होंने कहा कि दोनों कारोबार अलग हैं और केवल राजस्व के उसी हिस्से पर कर लगाया जाएगा, जो कर योग्य सेवाओं से प्राप्त हो रहा होगा। उन्होंने इस प्रयास में दिलचस्पी व्यक्त करने के लिए एमएसओ का आभार प्रकट किया और कहा कि इन सिफारिशों को अग्रसारित करने के लिए वे हर संभव प्रयास करेंगे।

इस सम्मेलन में सचिव, ट्राई, एस.के. गुप्ता, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय में अपर सचिव जयश्री मुखर्जी और सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने भी भाग लिया। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय में संयुक्त सचिव अंजु निगम के धन्यवाद प्रस्ताव के साथ इस सम्मेलन का समापन हुआ।

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