बन रहा है दबाव देसी इकाइयों का – ईकॉमर्स E-Commerce बाजार पर

  • जल्द हो सकते कुछ बड़े फैसले

लोकसभा चुनावों (Loksabha Elections) के मद्देनजर ऑनलाइन खुदरा बाजार (Online Retail Market) अथवा ई-कॉमर्स (E-Commerce) के क्षेत्र में सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों (MSME’s) तथा देसी व्यापारियों के लिए रास्ते बनाये जाने की पहल सरकार द्वारा की जा रही है। सरकार की इस मंशा को ई-कॉमर्स क्षेत्र भी समझ रहा है और छोटे मोटे प्रयास उसने अपने आप शुरू भी कर दिए हैं। अमेज़ॉन (Amazon) ने अभी हाल ही में अपना पहला “स्मॉल बिज़नेस डे” (Small Business Day) मनाया जिसमें एसएमई इकाईयों (SME Units), देसी कारीगरों (Local Artisana) एवं स्टार्टअप्स (Startups) द्वारा बनाये गए उत्पादों को भारी छूट देते हुए बेचा गया।

डीआईपीपी (DIPP) के हवाले से आ रही खबरों से भी इस बात की पुष्टि हो रही है कि सरकार अमेज़ॉन (Amazon), स्नैपडाल (Snapdeal) एवं अन्य ई-कॉमर्स कम्पनियों के संपर्क में है और उनसे उन तरीकों पर काम करने के लिए दबाव बना रही है जिससे स्थानीय निर्माताओं को इन ऑनलाइन खुदरा प्लेटफॉर्म्स पर मदद मिल सके। कॉन्फ़ेडरेशन ऑफ़ आल इंडिया ट्रेडर्स – केट (CAIT)  पहले से ही सरकार पर ईकॉमर्स बाजार पर काबिज विदेशी कम्पनियों के खिलाफ लगातार दबाव बना रहा है।

भारत में ईकॉमर्स बाजार की स्थिति को देखते हुए अब देखना यह है कि सरकार स्वदेशी विनिर्माण (Local Manufacturing) को बढ़ावा देने के लिए वॉलमार्ट (Walmart) और अमेज़ॅन (Amazon) जैसी अमेरिकी कम्पनियों पर कितना दबाव बना पाती है। डीआईपीपी इस सन्दर्भ में स्थानीय निर्माताओं को कैसे बढ़ावा मिल सके इस पर कार्य कर रहा है। सूत्र यह भी बता रहे हैं कि ईकॉमर्स कम्पनियों ने सरकार की इस मंशा को भाँप लिया है और उन्होंने अपने आप ही आउटरीच कार्यक्रम (Outreach Programs) शुरू कर दिए हैं।

सरकार एक नई ई-कॉमर्स पॉलिसी (New E-Commerce Policy) तैयार करने में जुटी हुई है, नई ई-कॉमर्स नीति प्रेस नोट 3 (Press Note 3) का स्थान लेगी जिसे सरकार ने 2016 में पेश किया था। प्रेस नोट 3 द्वारा ईकॉमर्स कम्पनियों को अपने प्लेटफॉर्म पर किसी भी व्यक्तिगत अथवा विक्रेता से 25 प्रतिशत से अधिक व्यवसाय उत्पन्न करने पर रोक लगाई गई था।

हालांकि, देसी खुदरा विक्रेताओं (Local Retail Traders) का दावा है कि 2016 में पॉलिसी तैयार करने के बाद भी, ईकॉमर्स कम्पनियों ने अपनी सोर्सिंग नीति (Sourcing Policy) अथवा व्यवसाय में कोई बदलाव नहीं किया है। इन कंपनियों में अभी भी अपने पसंदीदा विक्रेताओं की एक सूची है जो उनके अधिकांश व्यवसायों के लिए जिम्मेदार है, ईकॉमर्स कम्पनियों की यही नीति स्थानीय छोटे व्यापारियों और निर्माताओं को नकारात्मक रूप से प्रभावित करती है।

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