भारत आस्ट्रेलिया की टेक्नोलॉजी, व्यवसायिक व्यवहारों और विशेषज्ञता का लाभ उठाने का इच्छुक

राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद ने कहा है कि भारत मेक इन इंडिया, डिजिटल इंडिया, स्वच्छ भारत और कुशल भारत कार्यक्रमों को आगे बढ़ाने के लिए आस्ट्रेलिया की टेक्नोलॉजी, श्रेष्ठ व्यावसायिक व्यवहारों तथा विशेषज्ञता का लाभ उठाने का इच्छुक है।

राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद वार्षिक आस्ट्रेलिया-भारत व्यवसाय परिषद की बैठक को संबोधित कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि सतत प्रयासों के कारण भारत यात्री कार, दोपहिया वाहन, उपभोक्ता इलेक्ट्रोनिक्स तथा मोबाइल हैंड सेट सहित अनेक क्षेत्रों में विश्व के महत्वपूर्ण मैन्युफैक्चरिंग केंद्र के रूप में उभरा है। उन्होंने कहा कि हमारी सूचना प्रौद्योगिकी, स्टार्ट अप, फिन—टेक, नैनो टेक्नोलॉजी तथा जैव प्रौद्योगिकी क्षमताएं आस्ट्रेलिया के बाजारों को सीखने और कमाने का अपार अवसर प्रदान करती हैं।

राष्ट्रपति ने कहा कि भारत और आस्ट्रेलिया के निवेश संबंधों को आगे बढ़ाने की आवश्यकता है। अभी दोतरफा निवेश 30 बिलियन आस्ट्रेलियाई डॉलर का है। राष्ट्रपति ने विश्वास व्यक्त किया कि इस निवेश में तेजी से और शीघ्र बढ़ोत्तरी होगी। उन्होंने कहा कि आस्ट्रेलिया की अर्थव्यवस्था पिछले कई दशकों से स्थिर और विकासोन्मुखी रही है और आज भारत के आर्थिक उत्थान की पूरे विश्व में चर्चा की जा रही है। उन्होंने बताया कि पिछले पांच वर्षों में वस्तु और सेवा क्षेत्रों में हमारा द्विपक्षीय व्यापार 75 प्रतिशत से अधिक बढ़ा है और यह व्यापार 2017 में 21.5 बिलियन डॉलर का हो ग्षेत्रों में हमारा द्विपक्षीय व्यापार 75 प3या।

राष्ट्रपति ने कहा कि भारत का आधारभूत संरचना क्षेत्र तेजी से आगे बढ़ रहा है। हमने पिछले ही वर्ष 10,000 किलोमीटर का एक्सप्रेसवे बनाया है। भारत 100 स्मार्ट सिटी, 70 हाई स्पीड ट्रेन कॉरिडोर तथा 10 ग्रीनफील्ड हवाई अड्डा बनाने का काम कर रहा है। निवेश की दृष्टि से हमारी आधारभूत परियोजनाएं आकर्षक अवसर प्रदान कर रही हैं। राष्ट्रपति ने कहा कि भारतीय कृषि और खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्रों में कारोबार का अवसर है। राष्ट्रपति ने कहा कि भारत लॉजिस्टिक चेन तथा अपने खाद्य सुरक्षा विकल्पों को प्रोत्साहन देने के लिए जल तथा ऊर्जा सक्षम कृषि टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में भारत और आस्ट्रेलिया के साथ सहयोग बढ़ाने का इच्छुक है।

राष्ट्रपति ने कहा कि भारत और आस्ट्रेलिया को चौथी औद्योगिक क्रांति का रूप देने के लिए साइबर स्पेस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ब्लॉक चेन विकास तथा अगली पीढ़ी की टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में सहयोग करना चाहिए।

स्रोत: पीआईबी.

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