दस्तावेजों की बढ़ेगी आवश्यकता स्टार्टअप्स, एसएमई, छोटे व्यापारी सभी हो जाएँ सावधान

गूगल अपनी यौन उत्पीड़न नीति पर अभी काम ही कर रहा था कि इस बीच फ्लिपकार्ट के बिन्नी बंसल ने व्यक्तिगत दुर्व्यवहार जांच के चलते कम्पनी से राम राम कर ली. बिन्नी का मामला पुराना है लेकिन वॉलमार्ट का आरोप यह है कि कम्पनी के अधिग्रहण के समय आदर्श पारदर्शिता का उल्लंघन किया गया. पेटीएम के शर्मा जी के सेक्रेटेरी की ब्लैक मेलिंग और धन उगाही वाला मामला अभी जाँच पड़ताल के दौर से गुजर रहा है. स्कूप हूप और ऐसे ही अन्य कई मामले पहले भी घट चुके हैं लेकिन तब ये मीटू की बयार भारत तक पहुँची नहीं थी.

इन सब घटनाओं का सन्दर्भ मैं यह लिखते समय मात्र इसलिए दे रहा हूँ कि अब स्टार्टअप्स अथवा एसएमई इकाईयों को अपने यहाँ लीगल सिस्टम को विकसित करना आवश्यक हो चुका है. दरअसल ये जिन कम्पनियों की भी हम बात कर रहे हैं ये कतई आज की डेट में स्टार्टअप नहीं हैं, लेकिन ये विकसित इसी संस्कृति में हुई हैं. स्टार्टप संस्कृति में आउटसोर्सिंग भी खूब पनपी है और स्टार्टअप्स के बहुत सारे विभाग आउटसोर्स होते रहे हैं. यहाँ आउट सोर्सिंग की बात मैं इसलिए भी छेड़ रहा हूँ कि यह करते समय हम अक्सर दस्तावेजों को प्रबंधन भी उन पर छोड़ देते हैं.

कौन सा दस्तावेज हमारे लिए महत्वपूर्ण है या भविष्य में महत्वपूर्ण हो जायेगा, उपरोक्त उल्लेखित घनाओं से समझा जा सकता है. अन्य सन्दर्भों में भी यह महत्वपूर्ण हो सकता है कि सूचना की जबरदस्त क्रांति के इस दौर में कब कौन सा नया नियम या कानून आ जाये कुछ कहा ही नहीं जा सकता. कोई भी नकारात्मक चीज सरकार के सामने आती है तो वह उसमें बदलाव के बारे में सोच सकती है. अतः अब नए नए नियम कानूनों का जल्दी जल्दी आना भी संभव है.

विधिक प्रक्रियाएं निश्चित रूप से ऐसे माहौल में महत्वपूर्ण होने वाली हैं और हर प्रकार के दस्तावेजों की महत्ता भी बढ़ने वाली है. आपसे नियामक प्राधिकरणों के आलावा आपके इन्वेस्टर और कल हो सकता है आपके ग्राहक तक इनकी मांग कर लें.

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