Cover इटारसी स्टार्टअप्स

इटारसी स्टार्टअप्स स्टार्टप संस्कृति को बढ़ावा देता स्टार्टअप 

स्टार्टप संस्कृति

आज कहानी इटारसी स्टार्टअप्स की। स्टार्टप संस्कृति को बढ़ावा देता एक स्टार्टअप।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जनवरी, 2016 में स्टार्टअप इंडिया कार्यक्रम की घोषणा की। सरकारी सहयोग की शुरुआत भर, इस क्षेत्र के परिदृश्य को बदल कर रख देगी।उस समय यह नहीं सोचा गया था।

लेकिन ऐसा हुआ और मात्र महानगरों तक सिमटी हुई एक व्यापारिक संस्कृति, ने पूरे देश में अपनी जड़ें फैला दीं। महानगरों से आगे बढ़ते हुए यह स्टार्टअप संस्कृति टियर टू, टियर थ्री शहरों तक जा पहुँची। नए उद्यमिओं के सपनों को साकार होने के नए अवसर मिले।

मध्य प्रदेश सरकार ने स्टार्टअप इंडिया कार्यक्रम को हांथों हाँथ लिया।  इसी के साथ यहाँ के युवाओं को भी उद्यमिता के क्षेत्र में नई राहें और साकार होते अनगिनत सपने दिखे।

Team इटारसी स्टार्टअप्स

इटारसी में स्थापित होती स्टार्टअप संस्कृति

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से 95 किलोमीटर दूर होशंगाबाद के पास, बसा कस्बाई सा शहर इटारसी भी इस स्टार्टअप बयार से अछूता नहीं रहा। यहाँ इस  बयार में तेजी लाने  प्रयास में जुटा है “इटारसी स्टार्टअप्स”। यहीं इटारसी में अजय राजपूत, रोहित चौहान अपने अन्य युवा साथियों के साथ मिलकर उद्यमिता को परवान चढ़ा रहे हैं इटारसी स्टार्टअप्स के साथ। इटारसी स्टार्टअप्स  मध्य प्रदेश के युवाओं को नई राहें दिखाते, समझाते हुए उन्हें स्टार्टअप इकोसिस्टम में समाहित करने के लिए प्रयासरत है।

ये उन्हें कैरियर काउंसिलिंग के साथ-साथ स्वरोज़गार, स्टार्टअप एवं नवाचार विषयों पर जागरूक कर रहे हैं।

उन्हें आवश्यक सहयोग, सलाह एवं संसाधन भी उपलब्ध करवा रहे हैं।

कैसे हुई शुरुआत

इटारसी स्टार्टअप्स की शुरुआत के सन्दर्भ में अजय राजपूत बताते हैं, “जब हमने यह इनिशिएटिव (Initiative) शुरू किया, तो  हम युवाओं से मिलते जुलते थे। उद्यमिता से सम्बंधित विभिन्न समस्याओं, चुनौतियों पर चर्चा करते थे। इसी दौरान हमें लगा कि इन सब समस्याओं का कोई समाधान खोजा जाना चाहिए।”

कुछ बुनियादी सवाल जैसे हम अपने स्टार्टअप की शुरुआत कैसे करें (How to Start a Startup) ? प्रोजेक्ट्स को इम्प्लीमेंट कैसे करें (How to Implement Projects) ? हमने महसूस किया कि हमारी ही तरह अन्य बहुत से युवा भी इसी प्रकार  सवालों से जूझ रहे  हैं ?

यहीं से इटारसी स्टार्टअप्स की स्थापना का विचार पुख्ता हुआ। एक ऐसा संगठन जहाँ न केवल जानकारी का नॉलेज बैंक हो, बल्कि जहाँ संसाधनों की उपलब्धता भी हो। जहाँ ज्ञान भी मिले और साथ ही साथ काम भी बने। Itarsi Startup Team

स्थापना का शुरुआती दौर

अपनी स्थापना के शुरूआती दौर में अजय बताते हैं।

“चुनौतियाँ तो बहुत ज़्यादा आईं। हम लोग जिस एरिया में रहते हैं, और जिस एरिया की बात कर रहे हैं, वहाँ  गवर्नेंस (Administrative Governance) समुचित रूप में उपलब्ध नहीं है। बुनियादी सुविधाएँ और बैंकिग भी सीमित ही है। जिला उदयोग एवं व्यापार केन्द्र  यहाँ से 20 किलोमीटर दूर होशंगाबाद में है। और सबसे बड़ी चुनौती लोगों में जानकारी और जागरूकता की भारी कमी है।”

“हम लोगों के लिए इंटरनेट ही एक सहारा और साधन था जिसकी वजह से हम जानकारी और सूचनाओं का आदान-प्रदान कर सकते थे। अनुभवी मेंटर और फैकल्टी (Experienced Mentors & Faculties) की भी यहाँ कमी थी। अभी भी हमें इनके लिए मेट्रो सिटीज की और देखना पड़ता है। जब हमने इन चुनौतिओं को स्वीकारा और हम खोजने निकले तो हमें अच्छे-अच्छे मेंटर मिले और संसाधन भी। उलझनें सुलझने लगी हैं और हमारा मार्ग अपने आप प्रशस्त होने लगा।”

Workshop @ Itarsi Startup

कैसे आये हम इस क्षेत्र में

इस क्षेत्र में आपको आना है, ये कैसे हुआ ? अजय राजपूत बताते हैं। “2001 में जब मैकेनिकल इंजीनियरिंग  में मेरा डिप्लोमा कम्प्लीट हुआ, घर की आर्थिक स्थिति कुछ ठीक नहीं थी। शिक्षा के दौरान कुछ विषय उद्यम और उद्यमिता से भी संबंधित थे। मेरा फ़ोकस शुरू से ही तकनीकि पर कम और उद्यमिता से संबंधित विषयों पर अधिक होता था।

मैंने शुरू से ही अपने ख़र्चे ख़ुद वहन किये। छोटे-छोटे काम करता था, और उनसे मैंने काफ़ी कुछ सीखा। जब मेरा डिप्लोमा कम्लीट हुआ तो मैंने जे.ई. (Junior Engineer) की प्रारंभिक परीक्षा दी। उस समय पहली बार मुझे लगा कि चार सौ रिक्तियों के लिए चार लाख से ज़्यादा के उम्मीदवारों के आवेदन आये हैं।  आपाधापी मची हुई है, नौकरी लेने के लिए। तो जे.ई. की परीक्षा मेरी पहली और आख़िरी परीक्षा थी। उसके बाद मैंने ठान लिया कि मुझे स्वरोज़गार (Self-Employment) के क्षेत्र में ही जाना है।

कैसे आगे बढ़े

फ़िर 2003 में मैंने ई-कॉमर्स (E-Commerce) के कुछ कोर्स किये। और इसके बाद मैं अपने शहर को डिजिटलाईज़ेशन की सेवाएँ मुहैया कराने लगा। और अभी तक करीब साढ़े 350 अलग-अलग थीम और सेगमेंट की वेबसाइटस बना चुके हैं हम। इससे मेरी स्थानीय नेटवर्किंग अच्छी हुई। उस समय मेरा फ़ोकस था कि मै ख़ुद की एक इंडस्ट्री स्थापित करूं। तब चीजें तकनीकि रूप से इतनी सरल और सुगम नही हुआ करती थीं। इमेल जैसे बुनियादी फंक्शन भी उस दौर में सामान्य व्यापार में कम ही उपयोग ही किये जाते थे। ऐसे में मै ख़ुद मशीनरी सप्लायर्स को पोस्ट कार्ड या अंतर्देशीय पत्र भेजा करता था।

हालाँकि मैंने सैकड़ों पत्र तमाम सप्लायर्स, एजेंसियों और परियोजना से संबंधित व्यक्तियों को भेजे, पर जवाब दो-चार का ही आया। फ़िर युवा मुझसे जुड़ने लगे।  शुरुआत में तो वैबसाइट या किसी डिजिटल काम के लिए ही वे मुझसे जुड़ते थे। पर बाद में ब्रेनस्टोर्मिंग सेशन्स के दौरान सभी के मन में एक ख्वाहिश होती कि मुझे अपनी ख़ुद की एक इंडस्ट्री स्थापित करनी है। संसाधन और जानकारी खुद मेरे पास भी तब लिमिटेड ही थी। लेकिन इतना पता था कि हम साथ मिलकर इन सभी चुनौतियों से लड़ सकते हैं.और इस तरह से “इटारसी स्टार्टअप्स” (ITARSI Startup) की नींव पड़ी.

Food Processing Zone @ Itarsi Startup

विस्तार योजना

इटारसी स्टार्टअप्स के विस्तार की योजना के सन्दर्भ में अजय बताते हैं। “चूँकि ये हमारा प्रथम वर्ष है, तो अभी हमारी योजना केवल तीस स्टार्टअप्स को लेकर चलने की है। मेरे आदर्श बिहार के आनंद सर रहे हैं, जिन्होंने “सुपर थर्टी Super 30” के नाम से अपना इनिशिएटिव शुरू किया था। कितने आई.आई.टी.’यंस दिये हैं उन्होंने देश को। हमारी सोच भी इसी दिशा में है, हम इटारसी शहर, मध्यप्रदेश और देश को शुरुआत में तीस स्थापित स्टार्टअप देना चाहते हैं।

स्टार्टअप ही क्यों

स्टार्टअप सेक्टर ही क्यों ? सवाल पर अजय कहते हैं, “हम इटारसी स्टार्टअप्स में सूचना प्रौद्योगिकी, ऑटोमोबाईल, डिजिटल, सिविल कंस्ट्रक्शन, खेती-किसानी इत्यादि पर फोकस कर रहे हैं। नर्मदापुरम संभाग का लगभग सम्पूर्ण क्षेत्र जो माँ नर्मदा और तवा का क्षेत्र है। यहाँ भूमिगत जल भी प्रचुर मात्रा में है और ज़मीन भी काफ़ी उर्वर है, अतः ऐसे में हमारा मुख्य फ़ोकस खाद्य प्रसंस्करण, कृषि, वानिकी, उद्यानिकी और खाद्यान्न मूल्य संवर्धन पर है। हमने प्रारंभिक तौर पर वही क्षेत्र चुने रहे हैं जिस क्षेत्र में युवाओं के लिए संभावनाएँ अधिक हैं.”

अजय राजपूत कहते हैं इस क्षेत्र के लिए सरकार द्वारा किये जा रहे प्रयास निश्चित तौर पर हमें उत्साहित करते हैं। लेकिन हमें यह भी समझ लेना चाहिए कि सब कुछ सरकार के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता। हमें स्वयं भी इस दिशा में प्रयासरत रहना होगा और खुद के साथ साथ औरों को भी आगे बढ़ाना होगा।

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