मास्टरकार्ड ने की मोदी की शिकायत: जानें, रुपे से किस हद तक बेदम हो रहीं विदेशी पेमेंट्स कंपनियां

अमेरिकी पेमेंट्स कंपनी मास्टरकार्ड ने अपनी सरकार से भारतीय पीएम नरेंद्र मोदी की शिकायत की थी। उसने कहा था कि मोदी घरेलू पेमेंट्स नेटवर्क रुपे को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रवाद का सहारा ले रहे हैं। दरअसल, मोदी ने कहा था कि रुपे का इस्तेमाल करना, देश की सेवा करना है क्योंकि इसका ट्रांजैक्शन फी देश में ही रहता है, विदेश नहीं जाता।

नई दिल्ली
मास्टकार्ड ने अमेरिकी सरकार से कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारत के अपने पेमेंट नेटवर्क रुपे को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रवाद का सहारा ले रहे हैं। उसने अपनी सरकार से शिकायत भरे लहजे में कहा है कि मोदी की इस स्ट्रैटिजी से उसे नुकसान हो रहा है। रुपे को मोदी सरकार का साथ मिलने से पेमेंट्स सेक्टर की वैश्विक कंपनियों का परेशान होना लाजिमी है, लेकिन इस कदर कि भारतीय प्रधानमंत्री की शिकायत करनी पड़ जाए! यह वाकई हैरतअंगेज है। आखिर क्या है इसकी वजह, जानते हैं…

डिजिटल पेमेंट की ओर तेज कदम 
मोदी सरकार ने 8 नवंबर, 2016 को नोटबंदी के ऐलान के साथ ही ‘कैशलेस इंडिया‘ की ओर कदम बढ़ा दिया। भारत में प्रति व्यक्ति आय भी तेजी से बढ़ रही है, बैंक अब छोटे-छोटे कस्बों तक पहुंच रहे हैं और नोटबंदी के कारण डिजिटल ट्रांजैक्शन तेज रफ्तार पकड़ रही है। यही वजह है कि मास्टरकार्ड समेत पेमेंट्स सेक्टर की दिग्गज कंपनियां भारत को एक बड़ा बाजार मानने लगी है, जहां उनके विस्तार की असीम संभावनाएं बन सकती हैं।

RBI के आंकड़े 
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) के ताजा आंकड़े बताते हैं कि अगस्त महीने में 14 करोड़ 42 लाख क्रेडिट कार्ड ट्रांजैक्शन हुए, जिनके जरिए 4 खरब 79 अरब 80 करोड़ रुपये का लेनदेन हुआ। वहीं, 35 करोड़ 70 लाख डेबिट कार्ड ट्रांजैक्शन के माध्य से 4 खरब, 89 अरब, 70 करोड़ रुपये इधर से उधर हुए। कुल मिलाकर भारतीयों ने किराना, इलेक्ट्रॉनिक्स, पोशाक एवं अन्य मदों में खरीद के लिए करीब 1 लाख करोड़ रुपये के कार्ड ट्रांजैक्शन हुए जो अगस्त 2017 में 7 खरब रुपये के मुकाबले करीब 43% अधिक थे। बैंकों की ओर से जारी डेबिट और क्रेडिट कार्ड्स से ट्रांजैक्शन मास्टरकार्ड और वीजा या रुपे जैसी पेमेंट कंपनियों के जरिए हो पाता है, जो हर ट्रांजैक्शन पर कुछ शुल्क वसूलते हैं।

रुपे का बढ़ता दबदबा 
मास्टरकार्ड और वीजा जैसी अमेरिकी कंपनियों का दर्द यही है। वर्ष 2012 में नैशनल पेमेंट काउंसिल ऑफ इंडिया (NPCI) द्वारा तैयार किया गया पेमेंट सिस्टम रुपे भारतीय पेमेंट्स मार्केट पर दोनों अमेरिकी कंपनियों का दबदबा खत्म कर चुका है। NPCI डेटा से पता चलता है कि इस वर्ष अगस्त महीने में रुपे कार्ड्स से 4 करोड़ 96 लाख ट्रांजैक्शन के जरिए 62 अरब 90 करोड़ रुपये का लेनदेन हुआ। इसका मतलब है कि हरेक ट्रांजैक्शन पर औसत 1,267 रुपये इधर से उधर हुए जबकि इसी दौरान सभी डेबिट और क्रेडिट कार्ड्स से राष्ट्रीय स्तर पर 1,933 रुपये का औसत ट्रांजैक्शन हुआ। इसमें रुपे से हुए ट्रांजैक्शन भी शामिल हैं।

नए ग्राहकों पर नजर
मास्टरकार्ड की सोच यहीं तक सीमित नहीं है। वह उन करोड़ों भारतीयों पर नजर जमाए है जिनके हाथ में कार्ड अभी पहुंचे ही नहीं। इस लिहाज से भी रुपे को विदेशी प्रतिस्पर्धियों पर बढ़त हासिल है क्योंकि सरकार उसे ही बढ़ावा दे रही है। मसलन, किसान क्रेडिट कार्ड रुपे आधारित ही है। इतना ही नहीं, डेबिट कार्ड्स भी तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। 10 साल पहले 1 करोड़ 40 लाख डेबिट कार्ड्स ही थे जो अब बढ़कर 1 अरब तक पहुंच चुके हैं। गौरतलब है कि NPCI का अपना अलग पेमेंट मोड है जिसे UPI के नाम से जाना जाता है। अगस्त महीन में 31 करोड़ 20 लाख बार इस पेमेंट मोड के इस्तेमाल से 5 अरब 42 करोड़ 10 लाख रुपये का ट्रांजैक्शन हुआ था। यानी, यह भी बेहद लोकप्रिय है।

अमेरिकी सरकार से मास्टरकार्ड की मांग 
मास्टरकार्ड ने जून महीने में नई दिल्ली पर संरक्षणवादी नीतियां अपनाने का आरोप लगाते हुए अमेरिकी सरकार से शिकायत की। उसने अमेरिकी सरकार से यह प्रस्ताव रखने की मांग की कि भारत सरकार रुपे से होनेवाली आमदनी को लेकर भ्रम फैलाने के साथ-साथ इसे विशेष प्रयास के तहत बढ़ावा दे रही है, जिसे रोका जाना चाहिए। इस मसले पर रॉयटर्स के सवाल के जवाब में मास्टरकार्ड ने कहा कि वह भारत सरकार की पहल का भरपूर समर्थन करती है और उसने भारत में बड़ा निवेश कर रखा है। लेकिन, कंपनी USTR नोट के वक्तव्यों पर टिप्पणी नहीं कर सकती।

साभार: नवभारत टाइम्स से.

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