कॉफी क्षेत्र के हितधारकों हेतु कॉफी कृषिथारंगा नामक प्रौद्योगिकी पहल की शुरूआत

वाणिज्य एवं उद्योग और नागरिक उड्डयन मंत्री श्री सुरेश प्रभु ने आज यहां एक कार्यक्रम में कॉफी हितधारकों के लिए डिजिटल मोबाइल विस्तार सेवाएं कॉफी कनेक्ट – इंडिया कॉफी फील्ड फोर्स एप और ‘कॉफी कृषिथारंगा’ लांच किये। मोबाइल एप कॉफी कनेक्ट को बागानों में काम करने वाले मजदूरों का काम आसान करने और उनकी कार्य क्षमता को बढ़ाने के लिए विकसित किया गया है।

‘कॉफी कृषिथारंगा’ सेवा शुरू करने का उद्देश्य उत्पादन, लाभ, वातावरण, निरंतरता को बढ़ाने के लिए सही सूचना और सेवाएं प्रदान करना है। ‘कॉफी कृषिथारंगा’ का कर्नाटक राज्य के चिकमगलुर और हासन जिलों में 30,000 से अधिक किसानों पर पहले साल के दौरान प्रायोगिक परीक्षण हो चुका है और चरणबद्ध तरीके से इसका विस्तार बाकी कॉफी उत्पादकों तक होगा। नाबार्ड ने इस प्रायोगिक परियोजना के लिए आंशिक आर्थिक मदद दी है।

सुरेश प्रभु ने डाटा विश्लेषण, आर्टिफिशियल इंटेलीजेशन, आईओटीएस और ब्लॉकचेन पर भी प्रायोगिक परियोजनाएं शुरू की।

भारत में कॉफी की खेती 3.66 लाख कॉफी किसानों द्वारा 4.54 लाख हेक्टेयर जमीन पर होती है। इसकी खेती मुख्यतः कर्नाटक (54 प्रतिशत), केरल (19 प्रतिशत) और तमिलनाडु (8 प्रतिशत) में होती है। कॉफी की खेती आन्ध्र प्रदेश, ओडिशा और पूर्वोत्तर के राज्यों में भी होती है।

भारत सरकार के डिजिटल पहलों के अनुरूप कॉफी बोर्ड ने कॉफी क्षेत्र के प्रौद्योगिकीय विकास के लिए कई महत्वपूर्ण डिजिटल पहलें शुरू की हैं। इन पहलों का उद्देश्य कॉफी क्षेत्र से जुड़े सभी हितधारकों को लाभ पहुंचाना है।

स्रोत: पीआईबी.

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