बजट रिलीसेज BY SMEसमाधान बजट की पाठशाला

बजट को समझने का सबसे आसान तरीका यही है कि सरकारी दस्तावेजों को पढ़ा जाय, उनके आंकड़ों को देखा जाय तो आप आसानी से समझ सकते हैं कि सरकार कहाँ क्या खर्च कर रही है. इसलिए SMEसमाधान आपके लिए लेकर आये हैं, बजट रिलीसेज. पहले पांच भाग कृषि एवं विज्ञान प्रौद्योगिकी से सम्बंधित हैं. आर्थिक सर्वेक्षण 2017-18 पर आधारित.

भारत को ज्ञान प्रदाता के रूप में विकसित होने की आवश्यकता है : आर्थिक सर्वेक्षण पार्ट 1

29 जनवरी, 2018, संसद भवन, नई दिल्ली.

केन्‍द्रीय वित्‍त एवं कॉरपोरेट मामलों के मंत्री श्री अरुण जेटली द्वारा संसद पटल पर प्रस्तुत आर्थिक सर्वेक्षण 2017-18 का अंश।

विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के रूप में उभरने के पश्चात् भारत को ज्ञान के एक उपभोक्ता के स्थान पर ज्ञान प्रदाता के रूप में परिवर्तित होने की आवश्यकता है।

केन्द्रीय वित्त और कॉरपोरेट मामलों के मंत्री श्री अरुण जेटली द्वारा संसद के पटल पर प्रस्तुत किए गए आर्थिक सर्वेक्षण 2017-18 में इस बात पर जोर दिया गया है।

एक तरफ वैज्ञानिक शोध और ज्ञान का विस्तार हो रहा है और दूसरी तरफ भारत के युवा इंजीनियरिंग, चिकित्सा, प्रबंधन एवं सरकारी नौकरियों को उच्च प्राथमिकता देते हैं। भारत को वैज्ञानिक उद्यम के क्षेत्र में उत्साह को बढ़ाने व लक्ष्य को पुर्ननिर्धारित करने की आवश्यकता है ताकि अधिक से अधिक युवा वैज्ञानिक उद्यम के प्रति आकर्षित हो सकें। इससे ज्ञान भंडार का आधार मजबूत होगा। विज्ञान में निवेश, भारत की सुरक्षा व्यवस्था की मूलभूत आवश्यकता है। नागरिकों की सुरक्षा के लिए, जलवायु परिवर्तन से होने वाली अनिश्चितताओं का सामना करने के लिए तथा नए खतरों जैसे साइबर युद्ध, ड्रोन जैसी स्वायत्त सैन्य प्रणाली से राष्ट्रीय सुरक्षा बनाए रखने की चुनौती के लिए भी विज्ञान में निवेश की आवश्यकता है।

कृषि यांत्रिकीकरण का लाभ उठाने के लिए भूमि जोतों के संघटन की जरूरत : आर्थिक सर्वेक्षण पार्ट 2

29 जनवरी, 2018, संसद भवन, नई दिल्ली.

केन्‍द्रीय वित्‍त एवं कॉरपोरेट मामलों के मंत्री श्री अरुण जेटली द्वारा संसद पटल पर प्रस्तुत आर्थिक सर्वेक्षण 2017-18 का अंश।

भारतीय किसान पहले की तुलना में तीव्र गति से कृषि यांत्रिकीकरण अपना रहे हैं। यह जानकारी केन्‍द्रीय वित्‍त एवं कॉरपोरेट मामलों के मंत्री श्री अरुण जेटली ने आज संसद के पटल पर आर्थिक सर्वेक्षण 2017-18 प्रस्‍तुत करने के दौरान दी। आर्थिक सर्वेक्षण में कहा गया है कि ट्रैक्‍टरों की बड़ी संख्‍या में बिक्री यांत्रिकीकरण के स्‍तर को प्रदर्शित करती है।

विश्‍व बैंक अनुमान के अनुसार, भारत की आधी आबादी 2050 तक शहरी हो जाएगी। ऐसा अनुमान है कि कुल श्रम बल में कृषि श्रमिकों का प्रतिशत 2001 के 58.2 प्रतिशत से गिरकर 2050 तक 25.7 प्रतिशत तक आ जाएगा। इसलिए, देश में कृषि यांत्रिकी के स्‍तर को बढ़ाने की आवश्‍यकता है। विभिन्‍न कृषि परिचालनों में श्रम की सघन भागीदारी के कारण कई फसलों में उत्‍पादन की लागत काफी अधिक है। पिछले कुछ वर्षों के दौरान यांत्रिकी और बिजली के स्रोतों के उपयोग की दिशा में बदलाव आया है।

आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार, भारतीय कृषि में छोटे परिचालनगत जोतों की संख्‍या काफी अधिक है। इसलिए, कृषि यांत्रिकीकरण का लाभ उठाने के लिए भूमि जोतों के संघटन की जरूरत है।

कृषि उत्‍पादकता वृद्धि को बनाये रखने के लिए कृषि अनुसंधान एवं विकास की आवश्‍यकता : आर्थिक सर्वेक्षण पार्ट 3

29 जनवरी, 2018, संसद भवन, नई दिल्ली.

केन्‍द्रीय वित्‍त एवं कॉरपोरेट मामलों के मंत्री श्री अरुण जेटली द्वारा संसद पटल पर प्रस्तुत आर्थिक सर्वेक्षण 2017-18 का अंश।

कृषि अनुसंधान एवं विकास नवोन्‍मेषण का मुख्‍य स्रोत है जिसकी आवश्‍यकता दीर्घकालिक स्थिति में कृषि उत्‍पादकता विकास को बनाये रखने के लिए पड़ती है। केन्‍द्रीय वित्‍त एवं कॉरपोरेट मामलों के मंत्री श्री अरुण जेटली ने आज संसद के पटल पर आर्थिक सर्वेक्षण 2017-18 प्रस्‍तुत करने के दौरान उक्‍त बातें कहीं। सर्वेक्षण में कहा गया है कि कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग/ भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का वास्‍तविक व्‍यय 2017-18 के दौरान बढ़कर 6800 करोड़ (बजट अनुमान) तक पहुंच गया। आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार 2016 के दौरान देश में विभिन्‍न कृषि पर्या क्षेत्रों में खेती के लिए अनाज की 155 उच्‍च पैदावार की किस्‍में/ नस्‍लें जारी की गईं।

अनाज, दलहन, तिलहन, वाणिज्यिक और चारा फसलों के लिए नई किस्‍में/ संकर नस्‍लें विकसित की गई हैं जो कि बढ़ी हुई गुणवत्ता के साथ विभिन्‍न जैविक और गैर जैविक दवाबों को सहन कर सकती है।

अनाज: वर्ष 2017 के दौरान देश के विभिन्‍न कृषि पर्यावरणों में खेती के लिए 117 उच्‍च पैदावार किस्‍में/ संकर किस्‍में जारी की गई जिनमें शामिल हैं- चावल की 65 किस्‍में, गेंहू की 14, मक्‍का की 24, रागी की 5, बाजरा की 3, ज्‍वार, जई, कंगनी, कोदो मिलेट, लिटिल मिलेट और प्रोसो मिलेट की एक-एक किस्‍म।

तिलहन: विभिन्‍न कृषि पर्यावरण क्षेत्रों के संबंध में 28 उच्‍च पैदावार वाली तिलहन की किस्‍में जारी की गई हैं जिनमें 8 सफेद सरसों की, 7 सोयाबीन की, 4 मूंगफली और अलसी की, 3 सूरजमुखी की, 2 अरंडी की और नाइजर की।

दलहन: विभिन्‍न कृषि पर्यावरण क्षेत्रों के संबंध में दहलन की 32 उच्‍च पैदावार की किस्‍में जारी की गई। लोबिया की 10, दाल की 6, मूंग की 3, अरहर, चना और फील्‍ड पी की 2-2, उड़द, राजमा और फावाबीन की एक-एक।

वाणिज्यिक फसलें: – विभिन्‍न कृषि पर्यावरण क्षेत्रों के संबंध में वाणिज्यिक फसलों की 24 उच्‍च पैदावार की किस्‍में जारी की गई जिसमें शामिल हैं – कपास की 13, गन्‍ने की 8, जूट की 3।

चारा फसलें: विभिन्‍न कृषि पर्यावरण क्षेत्रों के संबंध में खेती के लिए चारे की 8 उच्‍च पैदावार की किस्‍में/संकर किस्‍में जारी की गई जिनमें शामिल हैं- जई की 3, बाजरा, नेपियर संकर, चारा ज्‍वार, ग्रेन अमारन्‍यस, चारा चना और मारवल ग्रास की 1-1 किस्‍म।

भारतीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी-बीते एक वर्ष की उपलब्धियां आर्थिक सर्वेक्षण पार्ट 4

कृषि यांत्रिकीकरण में तेजी आई

29 जनवरी, 2018, संसद भवन, नई दिल्ली.

केन्‍द्रीय वित्‍त एवं कॉरपोरेट मामलों के मंत्री श्री अरुण जेटली द्वारा संसद पटल पर प्रस्तुत आर्थिक सर्वेक्षण 2017-18 का अंश। सर्वेक्षण के मुताबिक, भारतीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में बीते एक वर्ष के दौरान किए गए कार्य इस प्रकार हैं:

भारत में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में प्रकाशनों और पेटेंट पर गौर करने से भारतीय अनुसंधान की उत्पादकता एवं गुणवत्ता का आकलन करने में मदद मिल सकती है। वर्ष 2013 में वैज्ञानिक प्रकाशन के मामले में भारत विश्व में छठे स्थान पर था। इस रैंकिंग में लगातार सुधार हो रहा है। 2009-14 के बीच वार्षिक प्रकाशन की वृद्धि दर लगभग 14 प्रतिशत रही थी। एससीओपीयूएस डाटाबेस के अनुसार, इससे 2009 से 2014 के बीच वैश्विक प्रकाशनों में भारत की हिस्सेदारी 3.1 प्रतिशत से बढ़कर 4.4 प्रतिशत हो गई।

मोटे तौर पर प्रकाशन के रुझान से स्पष्ट होता है कि प्रकाशनों की संख्या के मामले में भारत के प्रदर्शन का स्तर क्रमिक रूप से सुधर रहा है।

प्रकाशन में सुधार के अलावा गुणवत्ता में सुधार का रुझान भी देखने को मिल रहा है।

पेटेंट

यदि पत्रिका प्रकाशन से विज्ञान में किसी देश का कौशल प्रदर्शित होता है तो पेटेंट, प्रौद्योगिकी में उसकी स्थिति को दर्शाते हैं। डब्ल्यूआईपीओ के मुताबिक, भारत विश्व में 7वां बड़ा पेटेंट फाइलिंग ऑफिस है। 2015 में चीन (1,101,864), यूएसए (589,410), जापान (318,721), कोरिया गणराज्य (213,694) और जर्मनी (91,726) की तुलना में भारत में 45,658 पेटेंट पंजीकृत हुए। हालांकि भारत प्रति व्यक्ति पेटेंट के मामले में काफी पीछे हैं।

भारत की घरेलू पेटेंट प्रणाली एक बड़ी चुनौती रही है। भले ही दूसरे देशों में भारत के पेटेंट आवेदन और स्वीकृतियों की संख्या तेजी से बढ़ी है, लेकिन देश में यह स्थिति नहीं है। भारत के 2005 में अंतरराष्ट्रीय पेटेंट व्यवस्था से जुड़ने के बाद क्षेत्रीय आवेदनों की संख्या तेजी से बढ़ी है। हालांकि 2008 के बाद स्वीकृत पेटेंट की संख्या तेजी से घटी है और इनका स्तर कम बना हुआ है। जहां 2015 में विदेशी कार्यालयों में भारतीय नागरिकों के 5000 पेटेंट को स्वीकृति मिली, वहीं भारत में फाइल करने वाले नागरिकों की संख्या 800 से कुछ ज्यादा रही।

सरकार ने हाल में 450 अतिरिक्त पेटेंट परीक्षकों की नियुक्तियां कीं और 2017 में भारतीय नागरिकों के लिए एक त्वरित फाइलिंग व्यवस्था का निर्माण किया। पेटेंट फाइलिंग से जुड़ी समस्याओं के समाधान निकाले गए हैं। नवाचार को पुरस्कृत करने वाली प्रभावी पेटेंट व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिहाज से पेटेंट से जुड़ी मुकदमेबाजी का हल निकालना काफी अहम होगा।

2017-18 में किसानों के लिए 20,339 करोड़ रुपये मंजूर आर्थिक सर्वेक्षण पार्ट 5

29 जनवरी, 2018, संसद भवन, नई दिल्ली.

केन्‍द्रीय वित्‍त एवं कॉरपोरेट मामलों के मंत्री श्री अरुण जेटली द्वारा संसद पटल पर प्रस्तुत आर्थिक सर्वेक्षण 2017-18 का अंश।

केन्‍द्रीय वित्‍त एवं कॉरपोरेट मामलों के मंत्री श्री अरुण जेटली ने बताया कि कृषि क्षेत्र में उच्च उत्पादकता और समग्र उत्पादन प्राप्त करने के लिए क्रेडिट एक महत्वपूर्ण आगत है। लघु अवधि फसल ऋण पर किसानों को प्रदान की जाने वाली ब्याज सहायता से उत्पन्न होने वाली विभिन्न देयताओं को पूरा करने के लिए 2017-18 में भारत सरकार द्वारा 20,339 करोड़ रुपये की धनराशि अनुमोदित की गई है। इसके साथ ही फसल कटाई के बाद भंडारण संबंधी ऋण देश में किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण आगत अपेक्षा को पूरा करता है। विशिष्टया छोटे और सीमांत किसान जो कि मुख्य उधार लेने वालों में से है।

आर्थिक सर्वेक्षण के मुताबिक यह संस्थागत क्रेडिट किसानों को क्रेडिट के गैर-संस्थागत स्रोत से अलग करने में मदद करेगी। जहां पर यह ब्याज की ऊंची दरों पर उधार लेने के लिए मजबूर होते हैं। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत फसल बीमा, फसलों के ऋण से जुड़ा है। लिहाजा किसान फसल ऋणों का फायदा उठाते हुए सरकार की दोनों किसानों के अनुकूल पहलों से लाभ ले सकेंगे।

आर्थिक सर्वे के मुताबिक यह सुनिश्चित करने के उद्देश्य से कि किसान बाजार में अपने उत्पादन के संबंध में लाभदायक कीमतों का लाभ उठाएं, सरकार सुधार को लेकर कदम उठा रही है। इलेक्ट्रानिक राष्ट्रीय कृषि बाजार (ई-नाम) जो सरकार द्वारा अप्रैल 2016 से आरंभ किया गया था, का उद्देश्य इलेक्ट्रोनिक प्लेटफॉर्म के माध्यम से बिखरे हुए एपीएमसी को एकीकृत करना और किसानों को ऑनलाइन व्यापार करने की सलाह दी जाती है, यह भी अहम है कि वे मान्यता प्राप्त गोदामों में अपने उत्पादन का भंडारण करके फसल की कटाई के बाद ऋण का फायदा उठाएं। यह ऋण ऐसे छोटे और सीमांत किसानों जिनके पास किसान क्रेडिट कार्ड है, को 6 माह की अवधि के संबंध में ऐसे भुगतान पर 2 प्रतिशत की ब्याज सहायता उपलब्ध है। इसमें किसानों को बाजार में उछाल आने के समय अपनी बिक्री करने और मंदी के दौरान बिक्री से बचने में मदद मिलेगी। अतः छोटे एवं सीमांत किसानों के लिए आवश्यक है कि वे अपने केसीसी को बनाए रखें।

आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार सरकार 2022 तक किसानों की आय दोगुना करना चाहती है। इसके लिए बीज से लेकर बाजार तक सरकार ने तमाम तरह की पहल की है। संस्थानात्मक स्रोतों से क्रेडिट, सभी ऐसे सरकारी प्रयासों जैसे सायल हेल्थ कार्ड, इनपुट प्रबंध, प्रधानमन्त्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY), PMFBY, E-NAM इत्यादि में पर ड्रापमोरक्रॉप को विभुषित करेगा।

Source: PIB.

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