जीएसटी काउन्सिल बैठक में एमएसएमई क्षेत्र को कुछ सौगातें मिलने की सम्भावना

जीएसटी काउन्सिल की अगली बैठक 4 अगस्त को होने वाली है. इस बार की यह बैठक एमएसएमई की बेहतरी के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है. इस बैठक का आह्वाहन नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद किया और सभी राज्यों को सूचित किया गया है कि वे अपने अपने राज्यों के एमएसएमई क्षेत्र के समक्ष जीएसटी के संदर्भ में मौजूद चुनौतियों के बारे में ब्यौरे लेकर उपस्थित हों. इस बैठक में प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष दोनों ही करों से सम्बंधित विषयों पर चर्चा की जायेगी.

सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम इस बैठक से अपने लिए जीएसटी के संदर्भ में कुछ रियायतों की उम्मीद कर सकते हैं, जिससे ये इकाईयां अपने प्रतिस्पर्धियों के मुकाबले अधिक प्रतिस्पर्धी बन सकें.

वित्त मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक जीएसटी के सन्दर्भ में अनुपालन बोझ अथवा (कंप्लायंस बर्डन) में कमी लाने, प्रयोज्यता के लिए उच्च सीमायें निर्धारित करने, कामकाजी पूंजीगत अवरोधों और लागू दरों को आसान बनाने के प्रयास किये जा रहे हैं.

एमएसएमई मंत्रालय के पास उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक देश में कुल 63 मिलियन एमएसएमई इकाईयां विनिर्माण, सेवा एवं ट्रेड व्यापार क्षेत्र में कार्यरत हैं, जिनमें से आधी से अधिक ग्रामीण क्षेत्रों से आती हैं. वर्ष 2015-16 में संपन्न हुए एनएसए सर्वे 73 के अनुसार यह क्षेत्र देश में 110 मिलियन लोगों को रोजगार उपलब्ध करवा रहा है, जबकि देश के आर्थिक उत्पादन में इस क्षेत्र का 29% तक योगदान है. रोजगार उत्पादन में एसएमई क्षेत्र की महती भूमिका सरकार के लिए भी महत्वपूर्ण है और इसीलिए उनके लिए व्यापार करना आसान बनाना सरकार की प्राथमिकता है.

सरकार ने छोटे उद्यमों को राहत प्रदान करने के लिए पहले से ही कई कदमों की घोषणा की है. रिवर्स चार्ज तंत्र का प्रावधान किया गया है, जिससे पंजीकृत खरीदारों द्वारा अपंजीकृत आपूर्तिकर्ताओं से खरीद के लिए कर चुकाना पड़ता था, इसमें कमी आई है. 5 करोड़ रुपयों तक के राजस्व वाली कम्पनियों को तिमाही टैक्स रिटर्न्स फाइल करने की छूट दी गई, यह वे अपने करों का मासिक भुगतान करते हुए कर सकते हैं, इस कम्पोजीशन स्कीम की वजह से कर दाताओं की संख्या में वृद्धि दर्ज की गई है. इस स्कीम के तहत करदाता कर की कम निर्धारित दर का भुगतान कर सकते हैं और जीएसटी के तहत कठिन अनुपालन प्रक्रिया से बच सकते हैं

चलिए उम्मीद कायम है सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम क्षेत्र के लिए देखते 4-5 अगस्त तक और क्या सौगातें मिलती हैं इस क्षेत्र को.

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