इवेंट्स जहाँ ऑनस्पॉन वहाँ  

ऑनस्पॉन डॉट कॉम की स्थापना प्रायोजन (स्पौंसरशिप) प्रक्रिया एवं निर्णयों को आसन, सुरक्षित एवं स्वचालित करने के लिए की गई है. मुंबई स्थित स्टार्टअप कंपनी ऑनस्पॉन विभिन्न ब्रांडों का संबंध कार्यक्रम अथवा इवेंट आयोजकों के साथ कायम करती हैं. इन प्रयोजनों का आधार जनसंख्या संबंधी आंकड़ों और ब्रांडों के भौगोलिक लक्ष्यों तथा ब्राडों के विपणन बजट के आपसी संबंधों से होता है. इस ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर इवेंट्स की लिस्टिंग कोई भी आयोजक मात्र रजिस्टर करके कर सकता है.

हितेश गुसाईं

ऑनस्पॉन के संस्थापक हितेश गुसाईं बताते हैं, “इस परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए ऑनस्पॉन की टीम में विज्ञापन प्रदाता एवं विज्ञापन प्रसारण करने वाली दुनिया दोनों से जुड़े लोग शामिल हैं, जिन्हें मालुम है कि आपके लिए प्रायोजन पाना कितना महत्वपूर्ण है. हम ब्रांड्स के लिए उपयुक्त इवेंट्स की खोज करते हैं, जिससे उन्हें सर्वाधिक उपयुक्त कार्यक्रमों में हिस्सा लेते हुए, अपने विज्ञापनों पर निवेश का अधिकतम प्रतिफल प्राप्त हो सके. ये विज्ञापन, सैम्पलिंग, लीड जेनरेशन, बी2बी फोरम अन्य प्रकार की इंगेजमेंट्स के रूप में भी हो सकते हैं. इस मंच का निर्माण करने वाले लोगों में ब्लू चिप कम्पनियों में काम कर चुके वरिष्ट अधिकारी हैं, जो देश के चुनिन्दा बिज़नेस स्कूल्स से निकले हुए लोग हैं. इस मंच पर हमारे साथ 35000 से अधिक इवेंट मैनेजर्स एवं 700 से अधिक ब्रांड्स एवं 100 से अधिक इवेंट्स प्रतिदिन पंजीकृत हो रहे हैं . हमें यकीन है कि हम आने वाले समय में ग्राहकों का अधिकाधिक कर्षण प्राप्त कर सकेंगे क्योंकि हम अपनी टीम का विस्तार करते हुए अपनी पहुँच बढ़ाने वाले हैं.”

ऑनस्पॉन कार्यक्रम, इवेंट्स एवं एक्स्हीबीशंस के बढ़ते हुए क्षेत्र पर ध्यान रखते हुए अपने आपको भारत के सबसे बड़े प्रायोजन मंच के रूप में स्थापित करना चाहती है. हर दिन सैकड़ों की संख्या में कार्यक्रम आयोजक एवं विज्ञापन प्रदाता इस मंच से जुड़ रहे हैं. अभी तक भारत में कार्यक्रमों के आयोजन के लिए पैसा जुटाने का टिकटों एवं स्टाल्स की बिक्री के अलावा और कोई जरिया नहीं था. भारत में इवेंट्स और विशेषकर बिज़नेस इवेंट्स का बाजार बहुत तेजी के साथ बढ़ रहा है और ऑनस्पॉन इन आयोजनों के लिए प्रायोजकों की आपकी खोज को पूर्ण करता है. जहाँ तक ब्रांड्स की बात है, टाटा मोटर्स, डाइकिन, अडानी, हाउसिंग डॉटकॉम, महिन्द्रा हॉलिडेज, ज़ेब्रोनिक्स और निसान जैसे अनेकों ब्रांड हमारे साथ पहले से ही जुड़े हुए हैं, जो कि इस मंच की विश्वसनीयता एवं सफलता को स्वयं सिद्ध करता है.

इस प्लेटफोर्म की विश्वसनीयता निवेशकों के बीच भी कितनी है, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि स्वान एंजेल नेटवर्क ने इसे 2016 में 1 करोड़ रुपयों का निवेश प्रदान किया है. इस निवेश का उपयोग ऑनस्पॉन विपणन गतिविधियां बढ़ाने, उत्पादों को ऑनस्पॉन एवं अन्य उप-उत्पाद मंचों के माध्यम से प्रचारित करने तथा तकनीकि विकसित एवं सुदृढ़ करने के लिए किया.

अपनी शुरुआत के सन्दर्भ में हितेश गुसाईं बताते हैं, इसकी शुरुआत आईआईएम अहमदाबाद के लिए कार्यक्रमों के प्रायोजन की देख रेख करने के साथ हुई. मैंने महसूस किया कि भारत का शीर्षस्थ प्रबंधन संस्थान से होने के बावजूद हमारे लिए यह कार्य एक चुनौती ही होता था. इसलिए विभिन्न स्रोतों से प्राप्त सूचनाओं और जानकारी के आधार पर हमने एक जवाबदेह बाजार एवं मंच बनाने के लिए एक मौके के रूप में देखा. परसेप्ट के लिए एक सीईओ के रूप में काम करते हुए मैंने महसूस किया कि ऊंची लागत वाले आयोजनों और ब्रांडों के स्तर पर यह एक चुनौती है. विज्ञापन प्रदाता एवं विज्ञापन प्रसारण दोनों ही हैसियतों से काम करते हुए मैंने देखा कि इस समस्या का समाधान सूचनाओं के असंतुलन की पतली सी दीवार के उस पार ही है.

Team Onspon.

ऑनस्पॉन के साथ हमारा मिशन अनुसंधान का सहारा लेते हुए हम इन प्रायोजकों को आसान एवं मापन योग्य तरीकों से प्रसारण में मदद करना है. हम देश के सभी आयोजकों एवं ब्रांड्स के साथ हाँथ मिलाना चाहते हैं. अपने इस मिशन को सफल बनाने के लिए हमने टीम को दो भागों में विभक्त कर रखा है. एक टीम आयोजकों के लिए या उनके साथ काम करती है. जबकि दूसरी टीम  ब्रांड्स की खोज और उनके साथ भागीदारी में संलिप्त रहती है.

हम ब्रांड्स एवं इनके प्रतिनिधियों को कार्यक्रमों को देखने एवं उनका सीधे आंकलन की सुविधा मुफ्त एक प्रोत्साहन के तौर पर देते हैं. इस निवेश के पीछे हमारा विचार यह है कि हमारी सेवाओं का खुद आंकलन करें. हमारा अर्थशास्त्र शुल्क पर निर्भर न होकर परिमाण पर ज्यादा आधारित है. अभी तक किसी ने इस तरह से कार्य करने का प्रयास नहीं किया.

हम मेलर और पोस्ट्स के जरिए अधिकाधिक लोगों से संपर्क कायम करते हैं. कई ब्रांड फोरमों में भी हमें आमंत्रित किया जाता है जहां हम ब्रांड धारकों से संपर्क साधते हैं और उन्हें अपने मॉडल के बारे में समझाते हैं. वहीं कार्यक्रमों के आयोजन में हम गूगल विज्ञापनों और डिजिटल मार्केटिंग के दूसरे साधनों का भी सहारा लेते हैं. कार्यक्रम खोजने की प्रक्रिया अब 90 प्रतिशत तक ऑटोमैटिक यानी स्वचालित है जिनमें आयोजनों संबंधी नये प्रश्न या तो डिजिटल तरीके से या लोगों द्वारा एक दूसरे से सुनकर प्राप्त होते हैं. ब्रांडों को खोजना अपेक्षाकृत अधिक कठिन है, लेकिन प्रति ब्रांड आमदनी बहुत होने से हम ऑनबोर्ड कार्य करने पर ही ज्यादा ध्यान दे रहे हैं.

हम पुराने मीडिया सेल्स ढांचे को तोड़ने का प्रयास कर रहे हैं, इसलिए मीडिया के उपयोग संबंधी फैसलों में हम इन ब्रांड्स की मदद करते हैं. कार्यक्रमों का प्रायोजन गैर-परम्परागत मीडिया की श्रेणी में आता है. यहां काम करने का मेरा अनुभव मेरे बहुत काम आया और हमने एक ऐसा ढांचा खड़ा किया जिसमें एजेंसियों को हमारे कामकाज के समीकरणों से निर्णय लेने में मदद मिलती है.

हमने मुंबई में बहुत से कॉलेजेस एवं शैक्षिक संस्थानों में देखा कि वे अधिक से अधिक इवेंट्स एक सीमित बजट में करना चाहते हैं. यहीं हम उनके साथ प्रवेश करते हैं, उनकी इन्हीं इवेंट्स के लिए हम उन्हें प्रायोजक उपलब्ध कराते हैं और अच्छे ग्राहकों को आकर्षित करते हैं. हम तकनीकि एवं संसाधनों पर ध्यान देते हुए आगे बढ़ रहे हैं. सोशल मीडिया टूल्स का दौर आ चुका है और इसे अब मीडिया प्लान में होना ही होगा. ग्राहकों को ऑनलाइन, ऑफलाइन और ऑन द ग्राउंड जाकर सेवा देने के लिए टीम, टीम वर्क और नेटवर्क बढ़ाने की आवश्यकता महसूस की गई, इसीलिए हमने मुंबई के साथ साथ दिल्ली और बैंगलुरु में भी हम अपने ऑफिसेज के साथ मौजूद हैं.

हम ब्रांड्स की पहुँच बड़े पैमाने पर ले जाने में उन्हें मदद करते हैं और भी एकदम स्वचलित, 500 शीर्ष ब्रांड्स हमारे साथ हैं. हमारे लिए यह पोजिटिव है कि हमारी सेवाओं का उपयोग कर रहे ब्रांड्स हमसे संतुष्ट हैं और वे हमें अपने नेटवर्क में भी कई बार प्रमोट कर देते हैं. एजेंसियां हमारी बहुत ही मददगार रही हैं और उन्हीं सपोर्ट और सहभागिता से ऑनस्पॉन आगे बढ़ा है.

परम्परागत व्यापारिक मॉडल्स पर सवाल उठने लगे हैं, आने वाले समय में तकनीकि और संचालन महत्वपूर्ण होने वाले हैं. देखिये दुनिया की सबसे बड़ी कैब ऑपरेटर कंपनी के पास अपनी एक भी कार नहीं है, सबसे बड़ी हॉस्पीटैलिटी कंपनी एयरबीएनबी के पास अपना एक भी होटल नहीं है. इस तरह के और भी कई उदाहरण हैं. नयी सोच का दायरा व्यापक हो रहा है और स्टार्टअप्स बदलाव की इस लहर में सबसे आगे चल रहे हैं. सफलताओं के साथ असफलताएं भी सामने आयेंगी, लेकिन अंतत: सफलता की परिभाषा वही लिखेंगे जो इसमें कामयाब होंगे. और स्टार्टअप्स अब यही करने जा रहे हैं.

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कैसी लगी आपको उद्यमिता से जुड़ी हमारी यह कहानी, हमें जरूर लिखें. और क्या पढ़ना चाहते हैं आप उद्यमिता के इस मंच हमें अवश्य लिखें. संपर्क सूत्र editor@SMEsamadhan.com  …

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