R Narayan, Founder & CEO, Power2SME

एक संवाद पॉवर टू एसएमई के संस्थापक आर नारायण के साथ

भारत के एमएसएमई क्षेत्र को भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ की हड्डी कहा जाता है, आज एसएमई समाधान में पढ़िए पॉवर2एसएमई के संस्थापक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी, आर नारायण से एक संवाद. आर नारायण एसएमई क्षेत्र के साथ साथ स्टार्ट अप वर्ल्ड के सम्पूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र से भी जुड़े हुए हैं. देश के अग्रणी उद्योग संगठनों फिक्की एवं सीआईएमएसएमई इत्यादि में भी उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही है.

पॉवर टू एसएमई के वर्तमान प्रदर्शन के बारे में बताएं. 

पॉवर2एसएमई भारतीय एमएसएमई क्षेत्र के लिए पहले खरीद क्लब के रूप में आज से 6 साल पहले स्थापित किया गया था. आज पॉवर टू एसएमई भारत में एमएसएमई इकाईयों के लिए नेक्स्ट जेनेरेशन बी2बी ई-कॉमर्स फर्म के रूप में उभर रहा है और विभिन्न प्रतिस्पर्धाओं के बावजूद अपने उत्तरोत्तर की ओर अग्रसर है.

पिछले 6 वर्षों में पॉवर2एसएमई ने एक लाख से अधिक एमएसएमई इकाईयों को अपनी सेवाएं प्रदान की हैं. इस मंच पर 450 से अधिक आपूर्तिकर्ता एवं विनिर्माणकर्ता पंजीकृत हैं, जबकि 18 से अधिक वित्तीय संस्थानों के साथ भी इस मंच का समझौता है.  पॉवर टू एसएमई पर आने वाले 70% से अधिक ग्राहक अपने आपको दोहराते रहे हैं, जिससे पॉवर2एसएमई की विश्वसनीयता स्वयंसिद्ध है.

वित्त वर्ष 18-19 के लिए पॉवर2एसएमई ने इसके पहले वित्त वर्ष के मुकाबले तीन गुना अधिक वृद्धि दर्ज करने का लक्ष्य रखा है और हम उम्मीद कर रहे हैं कि इस लक्ष्य  की प्राप्ति आसानी से की जा सकती है.

विमुद्रीकरण एवं जीएसटी ने पॉवर2एसएमई को किस प्रकार प्रभावित किया? 

हालांकि विमुद्रीकरण एवं जीएसटी दोनों ही अर्थव्यवस्था में सुधार के लिए सकारात्मक कदम थे, लेकिन फिर भी एक कड़वी दवा की तरह इनके प्रभाव से कुछ समय के लिए अर्थव्यवस्था सुस्त अवश्य रही.

विमुद्रीकरण एक अप्रत्याशित कदम था और इससे पिछले वित्त वर्ष में नकदी की प्रचलित बाधा के परिणामस्वरूप ज्यादातर व्यवसाय प्रभावित हुए थे. जैसा कि आप जानते हैं, पॉवर2एसएमई लघु एवं मध्यम उद्यमों को ही अपनी सेवाएं प्रदान करता है और यह क्षेत्र इस बदलाव से सबसे अधिक प्रभावित हुआ था, अतः हम भी प्रभावित हुए. विक्रेता भुगतान चक्र जो प्रायः 20-21 दिनों का हुआ करता था वह अचानक बढ़कर 60-70 दिनों तक पहुँच गया था, अतः इसका प्रभाव पॉवर2एसएमई के प्रदर्शन पर भी पड़ा.

विमुद्रीकरण के प्रभाव से एमएसएमई इकाईयां धीरे धीरे उबर ही रही थीं कि तभी जीएसटी प्रणाली आ गई. नई कर व्यवस्था की उलझनों के बीच एमएसएमई इकाईयों में जुलाई 2017 तक उत्पादन में थोड़ा संकोच रहा, जिसका हमारे परिचालनों पर भी असर पड़ा.

जीएसटी कर प्रणाली में सुधार की दिशा में एक परिवर्तनकारी कदम था, हालांकि, जीएसटी के मामले में, पॉवर2एसएमई पहले से ही नई कराधान प्रणाली से जुड़ा हुआ था. कंपनी, औद्योगिक संगठन फिक्की की भी एक सदस्य होने के नाते, भारत के विभिन्न क्षेत्रों में एमएसएमई इकाईयों को इस सन्दर्भ में सक्रिय रूप से जागरूक कर रही थी और उनके लिए एसएमई परिवर्तन शिविरों का भी आयोजन कर रही थी. भारत की अग्रणी सलाहकार फर्मों के साथ मिलकर पॉवर2एसएमई ने एमएसएमई इकाईयों को जीएसटी के लिए तैयार करने और तदनुसार अपने व्यापार को संरेखित करने में पूर्ण सहयोग प्रदान किया.

भारत में वर्तमान एमएसएमई क्षेत्र एवं स्टार्टअप्स की स्थिति के संदर्भ में आपके क्या विचार हैं?

जहाँ तक देश में एमएसएमई क्षेत्र का प्रश्न है, यह भारतीय अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण अंग है. भारत के सकल घरेलू उत्पाद अर्थात जीडीपी में इस क्षेत्र का 28.77% तक का योगदान रहता है. हालांकि, वैश्विक दृष्टिकोण से इस योगदान पर गौर किया जाय, तो यह काफी कम है, क्योंकि एमएसएमई क्षेत्र के इस योगदान का वैश्विक औसत लगभग 49% के आस पास ठहरता है. एमएसएमई क्षेत्र देश की अर्थव्यवस्था के सर्वांगीण विकास की दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण है. अतः इस क्षेत्र को और भी मजबूती के साथ प्रोत्साहित किया जाना देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करने के लिए आवश्यक हो जाता है. इस क्षेत्र को प्रोत्साहित करने के लिए –

  • वित्तीय समावेशन में सुधार की आवश्यकता है.
  • 2020 तक सार्थक रोजगार सृजन करके, भारत को दुनिया भर में योग्य श्रमिकों की दृष्टि से सर्वाधिक महत्वपूर्ण स्थान बनाया जा सकता है.
  • नेक्स्ट जेनरेशन उद्यमिओं को नवाचार के साथ सहयोग दिया जाना चाहिए.
  • शहरी-ग्रामीण शमन (Mitigation) की आवश्यकता को इस प्रोत्साहन के साथ कम किया जा सकता है.

एमएसएमई इकाईयों अथवा उद्यमिता की सफलता के लिए वित्त पोषण एक प्राथमिक आवश्यकता है. इसीलिए, पॉवर2एसएमई ने एमएसएमई ढांचे को मजबूत करने के लिए वित्तीय नवाचार की रणनीति को अपनाया है. अपने वित्तीय एप्प फिनानएसएमई (FinanSME) के माध्यम से, पॉवर टू एसएमई उद्यमिता विकास के लिए, वित्तीय समावेशन ऋण एवं इक्विटी दोनों ही रूपों में उपलब्ध कराने का लक्ष्य साधे हुए है. जो वर्तमान एमएसएमई क्षेत्र के योगदान 16% को विश्व औसत 49% के मुकाबले प्रतिद्वंदी बनाने और बढ़ाने में निश्चित रूप से सहायक होगा.

वर्तमान में, भारत के उभरते स्टार्टअप अद्वितीय विचारों, उत्पादों एवं सेवाओं की पेशकश के साथ हमारे समक्ष उपस्थित हैं. देश के इन उभरते हुए स्टार्टअप्स में निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ी है और नव उद्यम पूँजी अर्थात वेंचर कैपिटल निवेशकों का रूझान भी इस क्षेत्र में तेजी के साथ बढ़ रहा है.

इस बीच बी2बी स्टार्टअप क्षेत्र में निवेशकों का रूझान बी2सी स्टार्टअप क्षेत्र के मुकाबले अधिक बढ़ा है, क्योंकि निवेशक इस क्षेत्र में अपनी पूँजी को अधिक सुरक्षित महसूस कर रहे हैं. बी2बी स्टार्ट अप क्षेत्र में निवेश की हिस्सेदारी तेजी के साथ बढ़ी है. वर्ष 2017 में नैसकॉम की एक रिपोर्ट के मुताबिक, बी2सी क्षेत्र में निवेश 85% से घटकर 76% रह गया है, जबकि इसके विपरीत बी2बी क्षेत्र में निवेश 27% से बढ़कर 31% होते हुए वृद्धि दर्ज कर रहा है.

भारत में एमएसएमई क्षेत्र एवं स्टार्टअप्स के भविष्य को आपको कैसे देखते हैं ?

भारत में स्टार्टअप्स

नैसकॉम द्वारा 2017 में भारतीय स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र (इकोसिस्टम) पर प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के  स्टार्टअप्स सम्पूर्ण विश्व व्यवस्था में तीसरी पायदान पर मौजूद हैं और इजराइल के साथ इनकी कांटे की टक्कर चल रही है. इस क्षेत्र के भारत में भविष्य के सन्दर्भ में यही कहा जा सकता है कि यह स्पेस एक लम्बा सफर तय कर चुका है. स्टार्ट अप पारिस्थितिकी तंत्र अब यहाँ मजबूती के साथ टिके रहने, आगे बढ़ने और विश्व में अपनी एक विशिष्ट पहचान बनाने की ओर अग्रसर है.

वर्ष 2016 में 1400 से अधिक नए स्टार्टअप्स ने भारतीय स्टार्टअप वर्ल्ड में प्रवेश किया. अगर ये इसी प्रकार स्वस्थ गति से हर साल बढ़ते रहे, तो वर्ष 2020 तक इनकी संख्या 10,000 पार कर जाने की सम्भावना है. देश में, प्रौद्योगिकी संचालित स्टार्टअप्स की तेजी के साथ बढ़ती संख्या देश में उद्यमी भावना के उदय, विकास एवं स्थापना का संकेत दे रही है.

भविष्य में सफल होने के लिए स्टार्टअप्स को उन समाधानों तक पहुंचना होगा, जो कि महत्वपूर्ण सामाजिक समस्याओं को हल कर सकें. इनके व्यापारिक मॉडल में सामाजिक समाधानों जैसे वेस्ट मैनेजमेंट, वाटर मैनेजमेंट, हेल्थकेयर सोल्युशंस इत्यादि का निहित होना आवश्यक है, जो कि समाज को सम्पूर्ण रूप से परिवर्तित कर रहे हों.

भारत में एमएसएमई क्षेत्र 

भारत के एमएसएमई क्षेत्र को भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ की हड्डी कहा जा सकता. यह क्षेत्र देश के 100 मिलियन से अधिक लोगों को रोजगार प्रदान कर रहा है, सकल घरेलू उत्पाद में इसका योगदान 28.77% है. जबकि निर्यात में 40% और औद्योगिक उत्पादन में यह क्षेत्र 45% तक का महत्वपूर्ण योगदान प्रदान कर रहा है. भारत दुनिया के सबसे बड़े एमएसएमई अड्डों में से एक है और इस क्षेत्र में अभी भी असीमित संभावनाएं हैं क्योंकि इस क्षेत्र की क्षमता का एक बड़ा हिस्सा अभी भी अप्रयुक्त ही पड़ा हुआ है. एसएमई क्षेत्र का एक बड़ा आधार होने के बावजूद जीडीपी में इस क्षेत्र की हिस्सेदारी अभी भी वैश्विक औसत 49% से काफी कम है, चीन, अमेरिका, ब्रिटेन जैसे देश हमसे इस मामले में काफी आगे हैं. एमएसएमई सेगमेंट को दरअसल एक खुले और स्तरीय खेल के मैदान की सख्त आवश्यकता है, जो एमएसएमई क्षेत्र की आवश्यकता के अनुरूप नीतियों, कार्यान्वयन और अभियानों से सुसज्जित हो.

इस अंतर को कम करने में सरकार के सक्रिय प्रयास निश्चित रूप से सकारात्मक सिद्ध होंगे, जैसे देश को विनिर्माण केंद्र के रूप में परिवर्तित करने का प्रयास न सिर्फ विनिर्माण, बल्कि निर्यात, औद्योगिक उत्पादन एवं वैश्विक बाजार में एमएसएमई इकाईयों की स्थापना को सकारात्मक दृष्टिकोण प्रदान करेगा. हालांकि, एमएसएमई क्षेत्र को अभी लंबा सफ़र तय करना है, लेकिन जिस दिन हम इस क्षेत्र की सम्पूर्ण क्षमता का इस्तेमाल करने में सफल हो जायेंगे, उस दिन हमारी अर्थव्यवस्था की तस्वीर कुछ और ही होगी.

पॉवर2एसएमई को लेकर आपकी भविष्य की योजनाएं क्या हैं?

पॉवर2एसएमई भविष्य में अपने उत्पाद पोर्टफोलियो को और भी विस्तृत करना चाहता है, निर्माण से शुरू करके हमने मेटल, पॉलीमर, कैमिकल और यार्न तक अपने आपको विस्तृत किया है. हम इन उत्पादों के भीतर भी  और उत्पादों की संभावनाएं तलाश रहे हैं, जैसे मेटल में इनगोल्ट, बिल्लेट्स तथा अन्य ग्रेड्स में भी हम अपने आपको विस्तृत कर रहे हैं.

विक्रेता संबंधों की सुदृढ़ता और विस्तार पर भी हम काम कर रहे हैं, पावर2एसएमई सामग्री के स्रोत एवं आपूर्ति के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजारों की भी तलाश कर रहा है, क्योंकि अभी भी हम इस दृष्टिकोण से प्रारंभिक अवस्था में ही हैं.

दरअसल एसएमई क्षेत्र के साथ हम अपनी वचनबद्धता को और भी पुख्ता करना चाहते हैं, हम राष्ट्रीय स्तर पर एसएमई क्षेत्र के लिए अधिक से अधिक उत्पादों की श्रृंखला विकसित करना चाहते हैं.

पॉवर2एसएमई की स्थापना कैसे हुई और इसकी स्थापना के पीछे क्या कहानी है ?    

लगभग एक दशक तक कॉर्पोरेट वर्ल्ड में काम करने के बाद मुझे यह एहसास हुआ कि मैं अपने विचारों को एक सफल व्यावसायिक मॉडल के रूप में निष्पादित कर सकता हूं और यहीं से अपनी खुद की फर्म शुरू करने का विचार आया. बीसवीं सदी ख़त्म हो रही थी और इक्कीसवीं हमारा इन्तजार कर रही थी, इसी बीच 1999 में मैंने डेनवे (Denave) नामक कम्पनी की स्थापना की. यह कम्पनी ग्राहकों के लिए ग्राहक ढूंढने का काम करती थी और इसी दौरान मुझे एसएमई एवं उद्यमों के बीच समानता और प्रायः इसकी कमी भी स्पष्ट रूप दृष्टिगोचित हुई. मुझे गहराई से यह महसूस हुआ कि यही वह अंतर जहाँ असीमित संभावनाएं हैं, और इस प्रकार बहुत ही स्वाभाविक रूप में पॉवर2एसएमई की स्थापना हो गई, और कारवां बढ़ता गया लोग जुड़ते चले गए.

कैसा लगा आपको आर नारायण से हमारा यह संवाद, हमें अवश्य लिखें. और क्या पढ़ना चाहते हैं, आप उद्यमिता के इस मंच पर  हमें अवश्य लिखें. 

संपर्क सूत्र editor@SMEsamadhan.com  …

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