हुब्बली में वंचितों को भी स्टार्टअप बनाने में जुटा सैंडबॉक्स स्टार्टअप इन्क्यूबेशन

कर्नाटका में धारवाड़ के निकट हुब्बली में देशपांडे फाउंडेशन के सैंडबॉक्स स्टार्टअप इन्क्यूबेशन लेकर आया है. इस केंद्र की दो विभिन्न परियोजनाओं का उद्दघाटन 17 जुलाई को कर्नाटक के मंत्री केजे जॉर्ज एवं नीति आयोग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अमिताभ कान्त 18 जुलाई को कर रहे हैं. इस उद्दघाटन और शुरुआत से पहले आइये एसएमई समाधान के माध्यम से हुब्बली में देशपांडे फाउंडेशन की इस सम्पूर्ण परियोजना का आंकलन करते हैं. वैसे तो देशपांडे फाउंडेशन इस क्षेत्र में 2008 से ही काम कर रहा है, लेकिन अब देश के सबसे इन्क्यूबेशन केन्द्रों में से एक का उद्दघाटन किया जा रहा है. हमने देशपांडे फाउंडेशन एवं सैंडबॉक्स स्टार्टअप से जुड़े महत्वपूर्ण लोगों से बातचीत की, पढ़िए उन्हीं से बातचीत के प्रमुख अंश.

डॉ देश देशपांडे

देशपांडे फाउंडेशन के संस्थापक, डॉ गुरुराज देश देशपांडे अपनी परियोजना के विषय में बताते हैं, सैंडबॉक्स स्टार्टअप भारतीय स्टार्टअप जगत को उन वंचित शहरों तक भी पहुँचाने का एक प्रयास है, जहाँ तक अभी ये स्टार्टअप यात्रायें पहुँच नहीं सकी हैं. देश के टियर 2 –  टियर 3 शहरों में भी प्रतिभाओं और नवोन्मेष की कोई कमी नहीं है, आवश्यकता है तो बस उनको इन्क्यूबेट करने की. सैंडबॉक्स स्टार्टअप इन्हीं वंचित शहरों तक अपनी पहुँच बनाने के लिए प्रयासरत है, जिनमें देश की लगभग 70% स्टार्टअप संभावनाएं विकसित हो रही हैं. सैंडबॉक्स स्टार्टअप अपने इन्क्यूबेशन सपोर्ट, ईएसडीएम क्लस्टर तथा मेकर लैब के साथ इन स्टार्टअप्स को विश्व स्तरीय सुविधाएं एवं कम्पलीट हैण्डहोल्डिंग प्रदान कर रहा है.

वो आगे कहते हैं, हमारा विज़न उद्यमिता में रूचि रखने वाले समाज के प्रत्येक सदस्य को उद्यमिता के लिए सक्षम बनाना है. सैंडबॉक्स स्टार्टअप्स के माध्यम से हम यहाँ एक ऐसे पारिस्थितिक तंत्र अथवा इको-सिस्टम का निर्माण करना चाहते हैं, जिसमें कोई भी उद्यमी आकांक्षा रखने वाला व्यक्ति अपनी कल्पना को यथार्थ के धरातल पर उतार सके. हमारा प्रयास है कि यह सब कुछ उन्हें सामाजिक-सांस्कृतिक, भौगोलिक, शैक्षिक, वित्तीय तथा उद्यम ज्ञान-क्षेत्र की परवाह किए बिना निशुल्क प्रदान किया जा सके जिससे वास्तविक भारत की वास्तविक कल्पना को सत्य सिद्धि हो सके.

डॉ देशपांडे बताते हैं, हम देश में उभरती हुई इस स्टार्टअप संस्कृति को विस्तृत रूप में महसूस करते हुए, इसे भारतीय अर्थव्यवस्था एवं समाज की विविध संरचनाओं में स्थापित देखना चाहते हैं. वेंचर निवेश से युक्त टेक्नोलॉजी स्टार्टअप महत्वपूर्ण हैं, लेकिन ये इस स्टार्टअप दुनिया का एक प्रकार मात्र हैं, इस मॉडल को भी विकसित करना देश के लिए आवश्यक है, क्योंकि हर समाधान के लिए आज तकनीकि की आवश्यकता एक प्राथमिक आवश्यकता है. दरअसल देशपांडे फाउंडेशन भारत को रोजगार, आर्थिक विकास, वैश्विक पहचान और सामाजिक रूप से परिपूर्ण देश के रूप में विकसित करने में उद्यमिता जगत की महत्वपूर्ण भूमिका देख रहा है और इसीलिए उद्यमिता के सम्पूर्ण रूपांतरण के उद्देश्य के साथ आगे बढ़ रहा है.

सैंडबॉक्स स्टार्टअप का उद्देश्य ऐसे वातावरण को उत्प्रेरित करना है. दुनिया में इस समय कुल 7 बिलियन जनसंख्या है. इनमें से लगभग दो मिलियन जनसंख्या को भारत के महानगरों और विदेशों में बैठा स्टार्ट पारिस्थितिक तंत्र प्रभावित कर रहा है या उन्हें अपनी सेवाएं प्रदान कर रहा है चाहे वह किसी भी रूप में.

डॉ देशपांडे इस सन्दर्भ में गूढ़ता के साथ चर्चा करते हुए बताते हैं, अन्य पांच मिलियन जनसंख्या में भी आर्थिक गतिविधियाँ तेज हो रही हैं, यहाँ स्टार्टअप्स के लिए एक बड़ा अवसर है कि वे वंचितों तक पहुंचकर अर्थव्यवस्था और समाज को आत्मनिर्भर बनाने में अपनी भूमिका अदा अदा करना चाहता है. भारत में भी इस आबादी को समाधान प्रदान करने के लिए भारत के महानगरों स्टार्टअप्स उभर रहे हैं, लेकिन वे इन पांच मिलियन वंचितों तक नहीं पहुँच पा रहे हैं. इन वंचितों को लक्षित करके ही धारवाड़ के हुब्बली में सैंडबॉक्स स्टार्टअप अपना इन्क्यूबेशन सेंटर खोल रहा है, जिसमें वह स्टार्टअप्स के लिए सर्वश्रेष्ठ पारिस्थितिकी तंत्र उपलब्ध कराने का प्रयास कर रहा है.

भारत में 1.3 बिलियन लोग रह रहे हैं, जिनमें से 200 मिलियन शहरों में रह रहे हैं, जबकि 1.1 बिलियन ग्रामीण अथवा अर्द्धशहरी इलाकों में रहते हैं. हुब्बली गांवों से घिरा हुआ एक छोटा सा शहर है यहाँ सैंडबॉक्स स्टार्टअप इन्क्यूबेशन सेंटर अपने स्टार्टअप्स को ग्रामीण एवं अर्द्धशहरी बाजार तक सीधी पहुँच और विश्वस्तरीय 500 प्रोफेशनल्स की सेवाएं, परामर्श और सहयोग प्रदान करते है जो देशपांडे फाउंडेशन हुब्बली से जुड़े हुए हैं और सैंडबॉक्स स्टार्टअ की विभिन्न परियोजनाओं से जुड़े हुए हैं. सैंडबॉक्स स्टार्टअप कौशल विकास, कृषि, आजीविका अथवा रोजगार और स्वास्थ्य सेवाओं को लक्षित कर आगे बढ़ रहा है. हमारी यह परिपक्व परामर्श दाताओं की मंडली स्टार्टअप्स के बिज़नेस मॉडल को परिष्कृत कर महत्वपूर्ण ग्राहक लक्षित बनाते हैं.

सीएम पाटिल

सैंडबॉक्स स्टार्टअप के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सीएम पाटिल परियोजना का ब्यौरा देते हुए कहते , अगर हुब्बली में बैठकर ये स्टार्टअप्स देश के ग्रामीण एवं अर्द्धशहरी बाजार को अपनी सेवाएं प्रदान कर सकते हैं तो वे विश्व बाजार के इन वंचित 5 मिलियन ग्राहकों तक अपनी पहुँच बना सकते हैं और दुनिया भर के आर्थिक पिरामिड को प्रभावित कर सकते हैं. सैंडबॉक्स स्टार्टअप की पहल सैंडबॉक्स ईएसडीएम क्लस्टर कर्नाटक सरकार एवं इंडिया इलेक्ट्रॉनिक्स एंड सेमीकंडक्टर एसोसिएशन के सहयोग से चलाई जा रही है. इस ईएसडीएम क्लस्टर का उद्देश्य ईएसडीएम उद्योग को बढ़ावा देते हुए  इलेक्ट्रॉनिक्स स्टार्टअप्स की मेंटरिंग एवं पोषण करते हुए इस वंचित बाजार तक उनकी पहुँच को बनाते हुए उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करेगा.

सीएम पाटिल बताते हैं, सैंडबॉक्स स्टार्टअप कर्नाटका के हुब्बली में 6000 स्क्वायर फीट में फैला एक स्टेट ऑफ़ आर्ट इन्क्यूबेशन केंद्र है. इसके अतिरिक्त सैंडबॉक्स स्टार्टअप का एक हिस्सा मेकर लैब भी है, जो कि 12000 स्क्वायर फीट क्षेत्र में फैला है. इसकी स्थापना भावुक एवं उत्साही शुरुआती उत्पाद स्टेज के स्टार्टअप्स को प्रशिक्षित करने के लिए मेकर्स लैब अपने स्टार्टअप्स के आइडियाज को उत्पाद में परिवर्तित करने का अवसर प्रदान करता है, उन्हें प्रोटोटाइप बनाने, प्रयोग इत्यादि करने के लिए प्रयोगशाला प्रदान करता है. यहाँ कोवर्किंग स्पेस के साथ एक स्टार्टअप को उसकी हरएक गतिविधि के लिए सहयोग प्रदान किया जा रहा है.

यहाँ की प्रयोगशाला टेस्टिंग एवं मेज़रमेंट इक्विपमेंटस, पीसीबी प्रोटोटाइपिंग मशीन्स, स्टैण्डर्ड बोर्ड्स, प्रिंटर्स, स्कैनर्स इत्यादि से युक्त हैं. यहाँ मध्यम स्तर की एसएमटी मैन्युफैक्चरिंग लाइन भी स्थापित की गई है, जो कि स्तरीय औद्योगिक प्रिंटेड सर्किट बोर्ड के उत्पादन में सक्षम है. यहाँ उपलब्ध उपकरण स्टार्टअप आइडियाज को प्रोटोटाइप में विकसित करने, टेस्टिंग, सर्टिफिकेशन करते हुए विकास का समय कम किया जा सकता है  और उत्पाद विकास के जीवन चक्र की पुनरावृत्ति की जा सकती है. यह केंद्र नवाचार, तकनीकि, प्रौद्योगिक, हार्डवेयर तथा अन्य स्टार्टअप्स विधाओं को भी विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है.

वित्त वर्ष 2017-18 में यहाँ के 3+ स्टार्टअप्स को संस्थागत वित्त प्राप्त हुआ है, जबकि 10+ स्टार्टअप्स को बाह्य निवेश प्राप्त हुआ है. यहाँ के स्टार्टअप्स द्वारा 60+ करोड़ रुपयों से अधिक का राजस्व या रेवेन्यु उत्त्पन्न किया गया है, जबकि 80+ स्टार्टअप्स ने यहाँ से स्टार्टअप पारिस्थितिक तंत्र से सम्बंधित लाभ प्राप्त किये हैं.

हुब्बली के सैंडबॉक्स ईएसडीएम क्लस्टर का उद्दघाटन 17 जुलाई को कर्नाटक के मंत्री केजे जॉर्ज कर रहे हैं, जबकि इन्क्यूबेशन सेंटर का उद्दघाटन 18 जुलाई को नीति आयोग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अमिताभ कान्त करेंगे.

इस अवसर पर देशपांडे फाउंडेशन के संस्थापक, डॉ गुरुराज देश देशपांडे, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, विवेक पवार, सैंडबॉक्स स्टार्टअप के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सीएम पाटिल इत्यादि उपस्थित रहेंगे.

देशपांडे फाउंडेशन और भी बहुत कुछ शिक्षा, रोजगार, कृषि इत्यादि क्षेत्रों में काम करते हुए  देश के आर्थिक एवं सामाजिक विकास के लिए कर रहा है उसकी चर्चा फिर कभी.

कैसी लगी आपको उद्यमिता से जुड़ी हमारी यह कहानी, हमें जरूर लिखें. और क्या पढ़ना चाहते हैं आप उद्यमिता के इस मंच हमें अवश्य लिखें. संपर्क सूत्र editor@SMEsamadhan.com  …

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