चौथे अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का विश्व भर में धूम धाम से आयोजन

योग एक परिचय

योग शब्द का जन्म संस्कृत शब्द ‘युज’ से हुआ है; जिसका अर्थ है – स्वयं का सर्वश्रेष्ठ, (सुप्रीम) स्वयं के साथ मिलन. पतंजलि योग के अनुसार, योग का अर्थ है मन को नियंत्रण में रखना. योग की कई शैलियाँ हैं, लेकिन हर शैली का मूल विचार मन को नियंत्रित करना है।

योग का जन्म (मूल) है- सिंधु घाटी सभ्यता (इंडस वैली सिविलाईज़ेशन) जिसमें कई शारीरिक मुद्राएँ और आसन शामिल हैं, पर अब उसमें कई परिवर्तन किए गए हैं और आजकल हम जो योगाभ्यास करते हैं, वह उस पुरातन समय से काफ़ी अलग है.

अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर स्वामी विवेकानंद ने शिकागो के धर्म संसद में अपने ऐतिहासिक भाषण में योग का उल्लेख कर सारे विश्व को योग से परिचित कराया. महर्षि महेश योगी, परमहंस योगानंद, रमण महर्षि जैसे कई योगियों ने पश्चिमी दुनिया को प्रभावित किया और धीरे-धीरे योग एक धर्मनिरपेक्ष, आध्यात्मिक अभ्यास के बजाय एक रस्म-आधारित धार्मिक सिद्धांत के रूप में दुनिया भर में स्वीकार किया गया.

हाल के दिनों में, टी.कृष्णमाचार्य के तीन शिष्यों, बी.के.एस आयंगर, पट्टाभि जोइस और टी.वी.के देशिकाचार विश्व स्तर पर योग को लोकप्रिय बनाया है.

अभी हाल तक, पश्चिमी विद्वान ये मानते आये थे कि योग का जन्म करीब 500 ईसा पूर्व हुआ था जब बौद्ध धर्म अस्तित्व में आया. लेकिन योग मुद्राओं के चित्रण हड़प्पा और मोहनजोदड़ो में हाल ही में की गई खुदाई में पाए गए. इससे ज्ञात होता है कि योग का चलन 5000 वर्ष पहले से ही था. लेकिन इसे साबित करने के लिए कोई लिखित रेकार्ड़ नहीं है.

वैदिक काल में एकाग्रता का विकास करने के लिए और सांसारिक जीवन की मुश्किलों को पार करने के लिए योगाभ्यास किया जाता था. पुरातन काल के योगासनों में और वर्तमान योगासनों में बहुत फ़र्क है.

उपनिषद, महाभारत और भगवद्‌गीता में योग के बारे में काफ़ी चर्चा हुई है. भगवद्गीता में ज्ञान योग, भक्ति योग, कर्म योग और राज योग का उल्लेख है. गीतोपदेश के दौरान भगवान श्रीकृष्ण समझाते हैं कि जिस व्यक्ति में दूसरों के प्रति विनम्रता और श्रद्धा की भावना हो, वह एक श्रेष्ठ अवस्था प्राप्त कर सकता है.

इस अवधि में योग साँसों एवं मुद्रा संबंधी अभ्यास न होकर महज एक जीवनशैली बन गया था.

आजकल जो योगाभ्यास हम करते हैं वह थोड़ा अलग तो है पर पतंजलि योग सूत्र पर ही आधारित है. अंतर सिर्फ़ इतना है कि अब हम सब मन से पहले अपने शरीर पर नियंत्रण करना चाहते हैं.

यह विवरण डॉ रामाजयम जी के एक लेख से लिया गया है.वे निमहांस में योग के एक पीएच.डी विद्वान हैं. मूल लिंक

विश्व भर में धूम धाम से मना अंतरराष्ट्रीय योग दिवस

आज विश्व भर में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का आयोजन किया गया. प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी ने भी फारेस्ट रिसर्च इंस्टिट्यूट, देहरादून, उत्तराखंड में आयोजित कार्यक्रम में हिस्सा लिया.

इस अवसर पर प्रधानमंत्री का संबोधन:    

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज कहा कि योग दुनिया में सबसे ज्यादा शक्तिशाली ‘एकजुट करने वाले बलों’ में से एक बन गया है। वह चौथे अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर देहरादून, उत्तराखंड के वन अनुसंधान संस्थान परिसर में बड़ी संख्या में एकत्रित हुए जनसमूह को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने वन अनुसंधान संस्थान परिसर में योग के प्रति उत्साही 50,000 लोगों और स्वयंसेवकों के साथ योगासन, प्राणायाम और ध्यान भी किया।

प्रधानमंत्री ने कहा, ‘दुनिया भर के लोगों के लिए यह गर्व का पल है कि लोग योग के साथ सूर्य के प्रकाश और गर्मी का स्वागत कर रहे हैं। अब देहरादून से डबलिन तक, शांघाई से शिकागो और जकार्ता से जोहानिसबर्ग तक हर जगह योग का प्रसार हो गया है।’

दुनिया भर के योग के प्रति उत्साही लोगों को स्पष्ट संदेश देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि पूरी दुनिया ने योग को हाथोंहाथ स्वीकार किया है और हर साल मनाए जाने वाले अंतरराष्ट्रीय योग दिवस में इसकी झलक देखी जा सकती है। उन्होंने कहा कि बेहतर स्वास्थ्य और कल्याण के लिहाज से योग दिवस सबसे बड़े जनांदोलनों में से एक बन गया है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि अगर हम चाहते हैं, पूरा विश्व हमारा सम्मान करे तो हमें हमारी विरासत और धरोहर को सम्मान देने में संकोच नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि योग सुंदर है, क्योंकि यह प्राचीन है और आधुनिक भी है, यह स्थायी है और अभी तक विकसित हो रहा है; यह हमारे अतीत और वर्तमान की सर्वश्रेष्ठ पद्धति है और हमारे भविष्य के लिए उम्मीद की किरण भी दिखाता है।

योग की संभावनाओं पर बात करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि योग में व्यक्तिगत के साथ ही समाज के सामने आने वाली अधिकांश समस्याओं का समाधान मौजूद है। उन्होंने कहा कि योग शांत, रचनात्मक और सुखी जीवन की ओर ले जाता है, तनाव और अनावश्यक चिंता को दूर करता है। उन्होंने कहा, ‘बांटने की बजाय योग एकजुट करता है। शत्रुता के बजाय योग आत्मसात करता है। समस्याएं बढ़ाने के बजाय योग उपचार करता है।’

स्रोत: पीआईबी.

 

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