क्या स्टार्टअप वर्ल्ड में भी हो रहा है लैंगिक भेदभाव

क्या स्टार्टअप वर्ल्ड में भी हो रहा है लैंगिक भेदभाव, बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप की रिपोर्ट तो यही बयान कर रही है.

उद्यमिता के संसार में भी क्या महिला उद्यमिओं के साथ भेद भाव होता है? लगता तो ऐसा ही है, ग्लोबल कंसल्टिंग फर्म बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप की एक रिपोर्ट में कुछ ऐसी ही बातें सामने आई हैं. इस रिपोर्ट में यह सामने आया है कि महिलाओं द्वारा संचालित स्टार्टअप्स को पुरुषों द्वारा संचालित स्टार्टअप्स की तुलना में कम निवेश प्राप्त हो रहा है.

बीसीजी के अनुसार जब महिला स्टार्टअप्स अपने आईडियाज की पिचिंग कर रही होती हैं उस समय उन्हें कमजोर प्रतिक्रिया मिलती है. जहाँ तक इनको मिलने वाले औसत निवेश की बात है तो पुरुषों द्वारा संचालित स्टार्टअप्स को औसतन 21 लाख $ का निवेश प्राप्त होता है, जबकि महिला स्टार्टअप्स को मात्र 9.35 लाख $ का ही निवेश प्राप्त होता है. महिला एवं पुरुष स्टार्टअप्स के मध्य यह भेदभाव इसलिए नहीं होता क्योंकि महिलाएं अपने आईडियाज को सही ढंग से रख नहीं पाती, बल्कि इसलिए क्योंकि निवेशक प्रायः उनके साथ लैंगिक भेदभाव कर बैठते हैं.

यहाँ गौर करने की बात यह है कि यह भेदभाव भी तब हो रहा है, जब कि महिलाओं द्वारा चलाये जा रहे स्टार्टअप्स का प्रदर्शन पुरुषों द्वारा चलाये जा रहे की तुलना में कहीं बेहतर है. रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि रेवेन्यु अथवा राजस्व के मामले में भी महिला स्टार्टअप्स का प्रदर्शन पुरुषों के मुकाबले कहीं बेहतर है, पाँच साल की अवधि के राजस्व पर जब गौर किया गया तो यहाँ पाया गया कि पुरुष स्टार्टअप्स के मुकाबले महिला स्टार्टअप्स का राजस्व 10% अधिक रहता है. महिला नेतृत्व वाले स्टार्टअप्स 1 रूपये के निवेश पर 78 पैसे का राजस्व पैदा करते हैं, जबकि वहीं पुरुष नेतृत्व वाले स्टार्टअप मात्र 31 पैसे का राजस्व का राजस्व ही पैदा कर पाते हैं.

अगर ऐसा हो रहा है, तो यह सही नहीं है, टैलेंट ही सर्वोपरि होना चाहिए और महिला स्टार्टअप यदि अधिक सक्षम हैं तो उन्हें तरजीह भी मिलनी चाहिए.

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