किराये पे उठाइए वो सामान जो न कर रहे हों इस्तेमाल

इस सप्ताह एसएमई समाधान एक सीरिज शुरू कर रहा है “स्टार्टअप इन द मेकिंग” की शुरुआत कर रहे हैं. इस सीरिज में हम उन स्टार्टअप्स को कवर करेंगे जो कैम्पस में उभर रहे हैं या इन द मेकिंग हैं. किराये पे डॉट कॉम एक ऐसा ही स्टार्ट अप है जो इंस्टिट्यूट ऑफ़ इंजीनियरिंग कॉलेज लखनऊ का एक स्टार्ट अप है.

पिछले दिनों लखनऊ के कुछ स्टार्टअप युवाओं से मुलाकात हुई, इन्होने एक नए सेगमेंट स्टूडेंट्स को टारगेट किया है, शहरों में पढ़ रहा विद्यार्थी है इनका सेगमेंट. विद्यार्थी एक बड़ा तबका है और जनसंख्या का महत्वपूर्ण हिस्सा है. हमारे देश में उच्च शिक्षा और उसकी तैयारी एक बड़ा सेगमेंट है, देश के कुछ शहरों जैसे दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, औरंगाबाद, जलगाँव, नागपुर, बड़ोदरा, पुणे, चेन्नई, जयपुर, लखनऊ, इलाहबाद, वाराणसी, नॉएडा, गुरुग्राम, कोटा, अहमदाबाद, इंदौर ऐसे शहर हैं जहाँ ये अपने भविष्य के स्वप्न बुन रहे हैं. इस तबके को लगातार अपने खर्च पूरे करने के लिए कुछ न कुछ साथ में करना ही पड़ता है, ट्यूशन एक रास्ता मिलता है उनको और उसके बाद कुछ ऑनलाइन ही सकता है.

यहीं पर हमने स्टूडेंट्स रहते हुए महसूस किया था, हमारे पास बहुत सी ऐसी चीजें होती हैं, जिन्हें हम फिलहाल इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं लेकिन वे हमारे लिए एकदम बेकार भी नहीं हैं, जैसे किताबें, नोट्स, गैजेट्स, डीवीडी, जिम इक्विपमेंटस, खेल के सामान सायकिल, कुर्सी, मेज इत्यादि बहुत कुछ हो सकता है इसमें. उन्हें ऑनलाइन किराये पे उठाईये और कुछ जेब खर्च निकालिए. यह सब कुछ बता रही है इस स्टार्टअप किराये पे डॉट कॉम की टीम जिसमें शामिल हैं सौरभ सिंह, अनुषा अग्रवाल, सुमित आनंद, विदित सिंह एवं संतोष राय, ये सभी इंस्टिट्यूट ऑफ़ इंजीनियरिंग कॉलेज लखनऊ में एमबीए के छात्र थे जब यह स्टार्टअप शुरू किया गया था. किराये पे डॉट कॉम के साथ हमने देश के कुछ चुनिदा पिचिंग कम्पटीशनस हिस्सा लिया और उन्हें जीता हमने.

हमने अनुषा की सहभागिता के हिसाब से डॉ एपीजे कलाम यूनिवर्सिटी हुए वीमेन इंटरप्रेन्योरशिप फोरम में प्रथम स्थान हासिल किया. आईआईएम लखनऊ के सिफि सेल पिचिंग कम्पटीशन में हमें तीसरा स्थान मिला, रोल कैमरा पिच कंपटीशन में हमने तीसरा स्थान हासिल किया.

किराये पे को उत्तर प्रदेश स्टार्ट अप यात्रा के दौरान मुख्य मंत्री योगी आदित्यनाथ के समक्ष भी प्रस्तुत किया गया था. आईआईएफटी दिल्ली की एक प्रतियोगिता में भी हमें टॉप 12 आइडियाज में स्थान हासिल किया. ये सभी कार्यक्रम 2017 के दौरान विभिन्न समय पर हुए थे.

एसएमई समाधान को ऐसा लगता है कि इस स्टार्टअप परियोजना को अगर देश के हर कैंपस से जोड़ा जा सके और हर कैंपस में इसे ऑपरेशनल बना लिया जाय तो यह छात्रों के जेबखर्च का अच्छा समाधान हो सकता है. सौरभ सिंह बताते हैं कि टेस्टिंग, मार्किट रिसर्च सब कुछ हो चुका है और जल्द ही हम यह स्टार्टअप लांच करने जा रहे हैं.

कैसी लगी आपको उद्यमिता से जुड़ी हमारी यह कहानी, हमें जरूर लिखें. और क्या पढ़ना चाहते हैं आप उद्यमिता के इस मंच हमें अवश्य लिखें. संपर्क सूत्र editor@SMEsamadhan.com  …

 

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