चेंज ऑफ़ सौल्स विद सोल्स: इनमेट ब्रांड के फुटवियर के साथ

“चेंज स्टार्ट्स विद यू” अर्थात परिवर्तन की शुरुआत खुद आपसे ही होती है और ऐसे ही परिवर्तन की एक मुहिम को आगे बढ़ा रहा है “बाई इनमेट”. महात्मा गाँधी के कथन “पाप से नफरत करो, पापी से नहीं” से प्रेरणा लेते हुए दिवेज मेहता के दिमाग में सजायाफ्ता कैदिओं के लिए कुछ करने का आईडिया आया. “चेंजिंग सौल्स विद सोल्स” के साथ महाराष्ट्र की जेलों में बंद कैदिओं की खातिर बाई इनमेट कार्यक्रम की शुरुआत की. इस कार्यक्रम के माध्यम से जेल के कैदिओं को लेदर क्षेत्र में यानी जूते चप्पल इत्यादि का निर्माण करने में लिप्त किया गया.

दिवेज मेहता

बाई इनमेट के संस्थापक दिवेज मेहता एक मुम्बईकर व्यवसाई हैं, जिनका परिवार लेदर इंडस्ट्री से 1982 से जुड़ा है , वे जूते चप्पल के चुनिन्दा ब्रांड्स को लेदर एक्सपोर्ट करते हैं. दिवेज मेहता ने सिंगापुर के मैनेजमेंट डेवेलपमेंट इंस्टिट्यूट से मार्केटिंग में एमबीए करने के बाद 2013 में टेर्गस वर्क्स प्राइवेट लिमिटेड की स्थापना के साथ इस समाजिक सोच से पूर्ण व्यवसाय बाई इनमेट की स्थापना की. उन्होंने 2013 में येरवडा सेंट्रल जेल, पुणे से इस परियोजना के सन्दर्भ में बातचीत शुरू की. उन्हें शुरुआत में 10 कैदिओं को एक नया जीवन प्रदान करने और अपने पैरों पर खड़े होने का अवसर प्रदान करने का अप्रूवल प्राप्त हुआ. आज 60 कैदी अपना कौशल विकास करके हमारे कुशल कारीगर बन चुके हैं. अप्रैल 2018 में बाई इनमेट ब्रांड मार्केट में लांच किया गया है.

जब दिवेज ने पारिवारिक विरासत आगे बढ़ाने की सोची, तो उन्होंने व्यवसाय के साथ साथ सामाजिक विकास पर भी ध्यान केन्द्रित किया और उन्होंने व्यवसाय और सामाजिक जिम्मेदारी दोनों को साथ निभाने की सोची और बाई इनमेट की स्थापना की. कुछ नया करने की कामना और बलवती धारणा के साथ वे चमड़े के व्यवसाय को सिर्फ जानवरों को मारने से कुछ अधिक बनाने के नजरिये से इसमें मानवीयता का पुट लेकर आये और अपनी गलतिओं की सजा भुगत रहे कैदिओं में जीने की एक आस लेकर आया बाई इनमेट. हम उन्हें जेल के कैदी और दोषी के रूप में नहीं बल्कि एक संभावित कार्यबल के रूप में देख रहे थे.

इस परियोजना को शुरू करने के लिए उन्होंने पहले तमिलनाडू में कोशिश की क्योंकि कम्पनी की चार मैन्यूफैक्चरिंग यूनिट्स वहीं हैं. कुछ कारणोंवश वहां अप्रूवल न मिल पाने पर हमने महाराष्ट्र में आवेदन किया और येरवडा जेल से हमें यह अप्रूवल प्राप्त हो गया और हमने राज्य की समसे बड़ी जेल अपनी एक विनिर्माण इकाई स्थापित की.

दिवेज बताते हैं कुछ भी हो परियोजना चुनौतीपूर्ण थी कादिओं को मात्र कौशल प्रशिक्षण प्रदान करना ही महत्वपूर्ण नहीं था बल्कि उन्हें मानसिक रूप से श्रमिक बनने के लिए की लिए तैय्यार करना बड़ी चुनौती थी. हमें आठ महीने लग गए उनका विश्वास जीतने में, वे बाहरी दुनिया से जल्दी कनेक्ट करना नहीं चाहते हैं, उनपे भरोसा नहीं कर पाते हैं.

आज, इनमें से अधिकतर कैदियों को विशेष कौशल में पूर्णतः प्रशिक्षित हैं, और कुछ ने तो फुटवियर इंडस्ट्री के आवश्यक मानकों के अनुरूप कौशल-सेट हासिल करने में महारत हासिल की है. बाई इनमेट के शुरुआती अनुभवों को साझा करते हुए दिवेज एक कहानी सुनाते हैं, उन्होंने कैदियों के बीच जिस पहले व्यक्ति से इस प्रोजेक्ट के बारे में बात की और जिसने कैदिओं से आगे बात चलाई वे आज उनके मैनेजर हैं, वह मशीन पर कुशल नहीं हैं लेकिन उनकी मैन मैनेजमेंट स्किल्स जबरदस्त हैं अतः हमने उन्हें जेल के अन्दर चल रही विनिर्माण इकाई में प्रबंधक की हैसियत से नियुक्त कर रखा है. दिवेज बताते हैं, एक दिन जेल में रह रहे एक इंजिनियर सामने आये, जो एक अच्छे पैकेज पर एक बड़ी कम्पनी में काम करते थे, वह एक मामले में जेल पहुँच गए, उनकी पत्नी तब माँ बनने वाली थीं जब वे यहाँ आये थे, वे मन लगाकर यहाँ काम करते हैं और सारे पैसे बचाकर घर भेजते हैं.

यह सब कुछ बहुत भावनात्मक था, कैदी हमारे साथ अपनी कहानी साझा कर रहे थे, वे इस परियोजना के साथ जुड़कर कैसे अपने भविष्य के लिए आशा की किरण ढूंढ रहे हैं वह यह हमें बता रहे थे. यह सब कुछ हमें इनमेट ब्रांड लांच करने और उससे लोगों के दिल को छूने की प्रेरणा मिली. इनमेट ब्रांड की एक जोड़ी खरीदकर ग्राहक इस पुनर्वास से जुड़कर एक सामाजिक उत्तरदायित्व की पूर्ति का संतोष भी प्रदान करता है.

दिवेज जेल के अन्दर की स्थिति के बारे में बताते हैं, जेल के नियमों के मुताबिक किसी भी कैदी को 55 रूपये/प्रतिदिन से अधिक पारिश्रमिक नहीं दिया जा सकता है, स्किल्ड लेबर को भी 61 रूपये से अधिक देय नहीं है. बाई इनमेट ने उन्हें 200 रूपये पारिश्रमिक देने के लिए जेल प्रशासन से विशेष अनुमोदन ले रखा है. दिवेज बताते हैं जेल में बंद कैदिओं में से लगभग 30% ऐसे हैं जो ऐसे गुनाहों की सजा भुगत रहे हैं जो उन्होंने किये ही नहीं हैं.

हम चाहते हैं कि हम अधिक से अधिक कैदिओं को इस मिशन के साथ जोड़ सकें, हम जेल के बाहर भी विनिर्माण इकाइयाँ स्थापित करने को तैय्यार हैं, उनकी सजा ख़त्म होने के बाद भी हम उन्हें रोजगार, आश्रय, भोजन इत्यादि सुविधाओं के साथ अपनाने को तैय्यार हैं. इनमेट इनका साथ आखीर तक निभाने को तैय्यार है.

हमने कुछ सजा ख़त्म कर चुके कैदिओं को पहले से ही रोजगार डे रखा है और हम कोल्हापुर में एक निर्माण इकाई लगा रहे हैं जिसमें इनके भविष्य का पुनर्वास हो सकेगा. इनमेट ब्रांड के फुटवियर की रेंज 2500 रूपये से शुरू होती है. आपको इनमेट  आप वेबसाइट पर लगभग 1200 जोड़ियाँ उपलब्ध नजर आयेंगी. टेर्गस सोशल मीडिया एवं अन्य मार्केटिंग तकनीकिओं के माध्यम से इनमेट ब्रांड को और बाजार में और भी मजबूती के साथ स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं.

दरअसल अब हम इन कैदियों के सम्पूर्ण जीवन के पुनर्वास का प्रयास कर रहे हैं, हम अब सिर्फ कैदियों तक ही सीमित नहीं रहना चाहते, बल्कि पीड़ितों के परिवारों के लिए, जो पिछले जीवन में किये गए कार्यों से प्रभावित हो चले हैं उनका भी पुनर्वास कर इस चक्र को पूर्ण करना चाहते हैं.

हम इनमेट के माध्यम से इन कैदियों के जीवन में सम्पूर्ण बदलाव लाना चाहते हैं, हमको यह नहीं भूलना चाहिए कि वे भले ही आज कैदी हों, लेकिन वे हैं समाज का ही हिस्सा, इनमें से कई तो ऐसे अपराधों की सजा भुगत रहे हैं जो उन्होंने किये ही नहीं हैं. हम इस परियोजना के साथ अब सेवानिवृत्त पुलिस वालों को भी शामिल कर रहे हैं जिससे कैदियों का डाटाबेस खंगाल कर उनके परिवार और उनसे संपर्क किया जा सके, उनका पुनर्वास किया जा सके और इनमेट को एक कम्पलीट इनमेट रिहैबिलेशन ब्रांड बना सकें.

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