अपने शिशु को सुरक्षित हाथों में सौपें, सैंडबॉक्स के साथ

स्टार्टअप्स अब हर क्षेत्र में आ रहे हैं, कभी स्टार्टअप परिभाषा में बंधकर तो कभी इससे इतर भी. ऐसी ही दो महिला स्टार्टअप हैं, जो आई.आई.टी., मुंबई से पढ़कर निकलीं और इन्होने बच्चों के लिए बड़े स्तर पर एक क्रेच की शुरुआत की. मुंबई से पूजा दास एवं अभीषा श्रीवास्तव ने मिलकर सैंडबॉक्स नामक विश्व स्तरीय सुविधाओं से युक्त दो क्रेच मुंबई के पवई इलाके में शुरू किये हैं. पूजा एवं अभीषा दोनों ने आई.आई.टी., मुंबई से बीटेक किया. पूजा ने इसके बाद आईएसबी हैदराबाद से एमबीए किया, जबकि अभीषा ने आई.आई.टी., मुंबई से ही एमटेक किया. फिर बाद में जब काम शुरू करने की बारी आई तब दोनों एक साथ मुंबई में मिले और शुरू कर दिया सैंडबॉक्स केयर.

सैंडबॉक्स डेकेयर दरअसल महानगरों में बढ़ते एकाकी परिवारों और कामकाजी माँ बाप के लिए एक समाधान है. सैंडबॉक्स शिशु देखभाल, बच्चों की देखभाल, स्कूल के बाद बच्चों की देखभाल, कॉर्पोरेट क्रेच एवं ऑन डिमांड बेबी सिटींग जैसे कार्यक्रम मुंबई के पवई एवं चान्दिवली  में स्थापित अपने दो केन्द्रों से चला रहा है. इन केन्द्रों की स्थापना के विषय में अभीषा पूजा बताती हैं, “हम दोनों को ही बच्चों से बहुत लगाव है और हमने देखा कि महानगरों की बदलती लाइफस्टाइल की वजह से बच्चे कई बार उपेक्षा का शिकार हो रहे हैं. किसी भी बच्चे की 90% बुद्धि का विकास मात्र 5 साल के भीतर होता है, अतः बच्चों का इस उम्र और उसके बाद भी उचित ढंग से लालन पालन आवश्यक है. छोटे स्तर पर चलाये जा रहे क्रेच इन समस्यायों को सही ढंग से संभाल नहीं पाते हैं और यहीं से हमारा इस व्यवसाय में आने का विचार मजबूत हुआ.”

“इस सन्दर्भ में शुरुआत करने के लिए हमें अहमदाबाद स्थित एकलव्य फाउंडेशन का काफी सहयोग मिला. एकलव्य फाउंडेशन के प्रोफेसर सुनील हांडा ने हमें इस क्षेत्र में काम शुरू करने के लिए, क्षेत्र की बारीकिओं को समझाया. एकलव्य फाउंडेशन द्वारा हमें प्रशिक्षण के स्तर पर काफी मदद मिली और उन्हीं की मदद से आज सैंडबॉक्स का स्वप्न साकार हुआ है.”

आधुनिक एकाकी परिवारों वाली जीवन शैली और पेशेवर युगलों की प्रतिबद्धताओं के बीच बच्चे कहीं उपेक्षित न रह जाएँ इसीलिए सैंडबॉक्स यह समाधान लेकर आया है. बचपन के दौरान बच्चों में प्रतिकूल रूप से प्रभावित होने की सम्भावना अधिक रहती है, सैंडबॉक्स केयर का उद्धेश्य यही है, कि जीवन में आगे बढ़ते हुए भी आपके बच्चे उपेक्षित न रहें. सैंडबॉक्स बच्चों में सीखने के माहौल को लक्षित करते हुए, बच्चों के समग्र एवं सर्वांगीण विकास पर ध्यान देता है. सैंडबॉक्स ने इन बच्चों के लिए व्यवस्थित और वैज्ञानिक पाठ्यक्रम विकसित किया है, जो संज्ञानात्मक, सामाजिक-भावनात्मक भाषा, साक्षरता एवं शारीरिक विकास जैसे सभी पहलुओं पर केंद्रित है.

सैंडबॉक्स में इन बच्चों का लालन पालन हमारी शर्तों पर नहीं, बल्कि यहाँ आने वाले बच्चों की शर्तों और उनकी आवश्यकता के अनुरूप होता है. हाल ही में मैटरनिटी बेनिफिट संशोधन बिल 2017 के बाद से कॉर्पोरेट जगत भी अपनी महिला प्रोफेशनल्स के प्रति काफी जागरूक हो गया है. हम खुद बहुत सारे कार्पोरेट ऑफिसेज में अपनी कॉर्पोरेट क्रेच सेवाएं प्रदान कर रहे हैं, इस सेवा से महिला प्रोफेशनल्स में अपने बच्चों की उपेक्षा होने का भय चला जाता है और उनकी कार्यक्षमता स्वयमेव ही बढ़ जाती है. दरअसल इन महिला प्रोफेशनल्स को एक फायदा अक्सर यह भी हो रहा है कि क्योंकि यह सेवा हम कॉर्पोरेट टाईअप द्वारा प्रदान कर रहे हैं तो यह खर्च उन्हें अधिकतर रिइम्बर्स भी हो जा रहा है, प्रोफेशनल्स और कम्पनी के बीच हम सुरक्षा के एक बाँध का निर्माण कर रहे हैं हम.

आधुनिक एकाकी परिवारों वाली जीवन शैली और पेशेवर युगलों की प्रतिबद्धताओं के बीच बच्चे कहीं उपेक्षित न रह जाएँ इसीलिए सैंडबॉक्स यह समाधान लेकर आया है. बचपन के दौरान बच्चों में प्रतिकूल रूप से प्रभावित होने की सम्भावना अधिक रहती है, एक बच्चे का 90% दिमागी विकास 5 वर्ष तक ही होता है, सैंडबॉक्स केयर का उद्धेश्य यही है, कि जीवन में आगे बढ़ते हुए भी आपके बच्चे उपेक्षित न रहें.  सैंडबॉक्स बच्चों में सीखने के माहौल को लक्षित करते हुए, बच्चों के समग्र एवं सर्वांगीण विकास पर ध्यान देता है. सैंडबॉक्स ने इन बच्चों के लिए व्यवस्थित और वैज्ञानिक पाठ्यक्रम विकसित किया है, जो संज्ञानात्मक, सामाजिक-भावनात्मक भाषा, साक्षरता एवं शारीरिक विकास जैसे सभी पहलुओं पर केंद्रित है.

भविष्य की योजनाओं के बारे में बात करते हुए अभीषा एवं पूजा कहती हैं, हम जल्द ही और डेकेयर केन्द्रों को बढ़ाने पर भी योजना बना रहे हैं. इन डेकेयर केन्द्रों का मॉडल क्या होगा इस सब पर विचार चल रहा है. हमारा लक्ष्य तो यही है कि हम सम्पूर्ण भारत में सैंडबॉक्स डेकेयर सेंटरस स्थापित करें, लेकिन यह सफ़र इतना आसान भी नहीं है. इस सपने को साकार करने के लिए हमें बहुत सारे संसाधनों की आवश्यकता होगी और हम इन संसधानों को किस प्रकार हासिल करें इसी दिशा में हमारा प्रयास जारी है.

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