“अस्तित्व”, जीवन के साथ भी, जीवन के बाद भी 

कुछ लोग अपना अस्तित्व खुद ही ढूँढा करते हैं, तो कुछ उसे ढूँढ़ने समाज की ओर बढ़ जाते हैं. पंकज मल्ल भी एक ऐसी ही शख्सियत हैं, जो अपना अस्तित्व देश और समाज के काज करने में ढूंढ़ते हैं. पंकज मल्ल के सफल नेतृत्व में “अस्तित्व” नाम का यह गैर सरकारी एवं अलाभकारी संगठन कार्य कर रहा है. अस्तित्व का लक्ष्य है कि उद्यमिता, कौशल विकास, जागरूकता एवं अन्य मार्गदर्शन के माध्यम से देश और समाज पर प्रभाव डालते हुए उनमें बदलाव लाया जा सके और स्थाई विकास की प्राप्ति की जा सके.

पंकज मल्ल अस्तित्व की इस यात्रा का जिक्र करते हुए कहते हैं, “सामाजिक उद्यमिता की यह यात्रा मात्र एक आदमी के रोमांच की कहानी भर नहीं है, यह हमारे अस्तित्व की पहचान की यात्रा है, जीने के अधिकार की है, सही तरह से जीवन जीने और जीवन के बाद भी जीवित बने रहने की है.”

अगले दस सालों में अस्तित्व कम सेकम 1 करोड़ लोगों के जीवन को सकारात्मक रूप से प्रभावित करना चाहता है. 2018 में हम 100 से अधिक स्कूल – कॉलेजों में अपने कार्यक्रमों के माध्यम से छात्रों के जीवन में समग्र विकास लाया जा सके.

पंकज मल्ल के नेतृत्व में अस्तित्व विभिन्न राज्यों में साईकिल यात्राओं के माध्यम से युवाओं एवं अन्य लोगों में जागरूकता फैलाते हुए समग्र सामाजिक बदलाव का प्रयास कर रहा है. हमने अपने साथ सौ से अधिक उद्यमिओं को जोड़ा है, हम अपनी पहुँच 1000 से अधिक स्कूल कॉलेजों एवं कॉरपोरेट्स तक अपनी पहुँच बनाना चाहते हैं, जिससे कि हम अपने कार्यक्रमों को आगे बढ़ा सकें. हम देश के 20 से अधिक शहरों में साइकिलिंग एवं कल्याण क्लब्स की स्थापना करना चाहते हैं जिससे कि समाज में स्वस्थ जीवन शैली के अवधारणा स्थापित हो सके.

अस्तित्व अब लगातार कार्यशालाएं आयोजित कर रहा है. ये कार्यशालाएं प्रेरणा, कल्याण, जीविका अथवा आजीविका, स्वरोजगार एवं उद्यमिता से सम्बंधित होती हैं. अस्तित्व अब पैडमैन की भूमिका भी निभा रहा है, इनकी एक टीम अब महिलाओं के लिए किफायती एवं जैविक रूप से नष्ट किये जा सकने वाले सेनेटरी पैड्स उपलब्ध करवाने की तैयारी में है, जिन्हें जल्द ही बाजार में उतारा जायेगा.

पंकज बताते हैं कि, “हम कौशल विकास, स्वरोजगार एवं रोजगार के माध्यम से लोगों को आत्मनिर्भर बनाना चाहते हैं. हम साबुन, कपड़ों, अगरबत्ती, सेनेटरी नैप्किन्स इत्यादि के लिए सूक्ष्म एवं लघु मैन्यूफैक्चरिंग इकाइयाँ लगाने पर भी कार्य कर रहे हैं. देश के ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार, स्वरोजगार एवं उद्यमिता का विकास अति आवश्यक है, क्योंकि इसके बिना वहां के लोगों का समग्र विकास संभव नहीं है.”

“पैडल द चेंज” नामक अभियान के माध्यम से ही अस्तित्व ने अपना अस्तित्व बना के रखा है. पैडल द चेंज नामक इन  साइकिल यात्राओं के जरिये ही अस्तित्व अपनी परियोजनाओं काम भी कर रहा है और इन्हीं के माध्यम से संस्था के लिए फंड भी एकत्रित किया जा रहा है. अभी तक इन्हें फण्ड करने के लिए कोई कॉर्पोरेट या औद्योगिक घराना आगे नहीं आया है और न ही इन्हें कोई सरकारी अनुदान ही मिल रहा है. कुल मिलाकर क्राउड फंडिंग के माध्यम से ही विभिन्न परियोजनाएं एवं पैडल द चेंज यात्रायें चल रही हैं.

आज से ही पंकज, एक बार फिर 3700 किलोमीटर लम्बी पैडल द चेंज यात्रा पर पुनः निकल चुके हैं, कच्छ से कलिंग तक की इस यात्रा में 7 राज्य, 15 बड़े शहर और 100 से अधिक गाँव या संथाओं से संपर्क साधा जाएगा और कम से कम 25000 लोगों से सीधा संपर्क साधा जाएगा. इस यात्रा के दौरान गुजरात, एमपी, यूपी, बिहार, झारखण्ड, पश्चिम बंगाल एवं ओडिशा तक पैडल चलेगा.

पैडल द चेंज नामक इस अभियान को अभी तक तो पंकज अपने दम पर अकेले यहाँ तक पहुंचा सके हैं, लेकिन अब वे चाहते हैं कि लोग भी आगे आयें और इस सामजिक काज में उनका साथ दें. उनका देश में साइकिल बनाने वाली बड़ी कम्पनिओं से आह्वाहन है कि वे आगे आयें और कम से कम “पैडल द चेंज” यात्राओं को तो वे स्पोंसर करें जिससे अस्तित्व के अस्तित्व को आगे बढ़ाया जा सके. कॉर्पोरेट घरानों से भी उनका अनुरोध है कि वे अपनी सीएसआर गतिविधिओं के अंतर्गत अस्तित्व को भी शामिल करें और देश तथा समाज के समग्र विकास की इस यात्रा में अपना योगदान दें.       

इन सभी परियोजनाओं, कार्यों एवं पैडल द चेंज यात्राओं में अभिलाष क्षत्रिय सिरिगिरी जो कि टीसीएस में सैप कंसलटेंट हैं पंकज का साथ देते हैं. पंकज एक पर्सनल एवं बिज़नेस ट्रांसफॉर्मेशन गुरु भी हैं और काफी समय से इस क्षेत्र में कार्य कर रहे हैं. स्वामी विवेकानंद एवं डॉ एपीजे अब्दुलकलाम से प्रभावित ये दोनों युवा सरकार की विभिन्न योजनाओं जैसे “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ”, “स्वच्छ भारत”, “स्वस्थ भारत”, “स्किल इंडिया” तथा “न्यू इंडिया” पर कार्य कर रहे हैं. अस्तित्व की मुख्य टीम में आरके पाठक, सीए रत्नेश कौशल, वंदना पांडे, सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता प्रशांत, आईटी विशेषज्ञ रवि शेखरआरोही प्रजापति एवं डॉ रुतु जो कि आईआईएम एवं इसरो से हैं, जैसे अपने अपने क्षेत्रों के सफल व्यक्तित्व अस्तित्व के इस मिशन में सहयोग कर रहे हैं.

 

2016 में पंकज मल्ल ने अकेले ही कारगिल से कन्याकुमारी की “पैडल द चेंज” यात्रा की. सिवान में एक स्कालरशिप परीक्षा कराई. अस्तित्व के लिए कार्य करते हुए पंकज ने देश भर के कई ग्रामीण इलाकों में 100 से अधिक शौचालयों का निर्माण करवाया है. अस्तित्व का यह सफ़र बस यूँ ही चलता रहे और देश में समग्र विकास की दिशा में भरपूर काज होता रहे, बस यही कामना है पंकज मल्ल की.

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कैसी लगी आपको सामाजिक उद्यमिता से जुड़ी  पैडल द चेंज की यह कहानी, हमें अवश्य लिखें, और क्या पढ़ना चाहते हैं आप यहाँ हमें अवश्य लिखें. संपर्क सूत्र editor@SMEsamadhan.com

 

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