सफलता की कहानी – रेडियो पिटारा

भारत गांवों का देश है. इसकी 60 प्रतिशत आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में रहती है. देश की आर्थिक प्रगति पर ग्रामीण विकास का महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है. विकास प्रक्रिया में संचार का महत्वपूर्ण योगदान है. लोगों की आवाज बुलंद करने, उनकी सार्थक भागीदारी हासिल करने और सामाजिक परिवर्तन को अंजाम देने में संचार की भूमिका है. किन्तु, ग्रामीण और शहरी संचार सुविधाओं में बड़ा अंतर है. ग्रामीण क्षेत्रों में सूचना प्रदाताओं की कमी है और सूचना के लिए विखंडित बाज़ार है, जिसमें अलग-अलग ग्राहक या ग्राहक समूह हैं. कुल मिलाकर कहें तो भली-भांति विकसित सूचना संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) ढांचे का ग्रामीण क्षेत्रों में नितांत अभाव है और आईसीटी कौशल का स्तर निम्नतर है. ‘‘रेडियो पिटारा’’, ने एक स्टार्ट  अप के रूप  में ग्रामीण आबादी के बीच संचार अंतराल की इस समस्या पर ध्यान दिया. उसने ग्रामीण श्रोताओं को लक्ष्य बनाते हुए एक संचार सेवा प्रदाता के रूप में काम करने का निश्चय किया. इस कंपनी के संस्थापक गौरव दीक्षित और शुभांकर भारद्वाज ने एमएनसी की आकर्षक नौकरियां छोड़ दीं और एक उद्यम शुरू किया जिसके लिए बुनियादी टेलीफोन और एक टोल फ्री नम्बर की व्यवस्था की गई ताकि अपने लक्षित ग्रामीण श्रोताओं से संपर्क किया जा सके. दोनों ने ‘रोजगार समाचार’ आनंद सौरभ से बातचीत में अपनी उद्यमशीलता की यात्रा के बारे में विचार साझा किए. उनके साक्षात्कार के कुछ अंश इस प्रकार हैं:

प्रश्न: आपके मस्तिष्क में इस व्यापार का विचार कैसे आया?

उत्तर: इसके पीछे ग्रामीण क्षेत्र के प्रति हमारी चेतना और सोच कहा जा सकता है. सच यह है कि भारत गांवों में रहता है. देश की 50-60 करोड़ आबादी पूर्ववर्ती बीमारू राज्यों में रहती है. परम्परागत मीडिया के जरिए इस आबादी तक पहुंचने के लिए कोई उचित संचार माध्यम उपलब्ध नहीं था. यदि हमारे पास कुछ था भी, तो वह मात्र दूरदर्शन और आकाशवाणी तक सीमित था. विज्ञापन के अपने प्रयास के दौरान हमने यह महसूस किया कि इस लक्षित श्रोता वर्ग तक पहुंचने के लिए कोई सशक्त मीडिया विकल्प उपलब्ध नहीं है. शहरी श्रोताओं के लिए संचार के विभिन्न रूप विकसित किए गएपरन्तु अनेक ब्रैंडों और एजेंसियों के लिए ग्रामीण इलाकों में पहुंच कायम करना अभी तक एक सपना बना हुआ था. संचार का अगला माध्यम मोबाइल है और यह तथ्य है कि लोग अब मोबाइल सेट के जरिए चौबीसो घंटे और सातों दिन जुड़े रहते हैंइसी से उद्यम का विचार मन में आया.

प्रश्न: प्रारंभ में आपका मिशन क्या था?

उत्तर :  ग्रामीण जनता को सूचना देना और उसे रूपांतरित करना. पिटारा का लक्ष्य ग्रामीण संचार सेवाओं में एक विशेषज्ञ के रूप में पेश आना है.

प्रश्न: आपके उद्यम में कितने कर्मचारी काम करते हैं?

उत्तर : वर्तमान में हमारे पास 10 पूर्ण कालिक कर्मचारियों की टीम है और कुछ अन्य विशेषज्ञ हैं, जो कार्य योजना के अनुसार काम करते हैं. हमारी योजना है कि कुछ और गुणवत्तापूर्ण संसाधन भर्ती किए जायें. वास्तव मेंतथ्य यह है कि हम उन गिने-चुने संगठनों में शामिल होने का गौरव प्राप्त करना चाहते हैंजो पूर्व अपेक्षा के रूप में शैक्षिक योग्यता की मांग नहीं करते हैं. हम सिर्फ यह देखते हैं कि व्यक्ति में ग्रामीण श्रोताओं के साथ संवाद कायम करने की प्रभावशाली अंतर्दृष्टि और संचार कौशल में अभिरुचि हो.

प्रश्न: आप किस तरह की सेवाएं प्रदान करते हैं?

उत्तर: हम ग्रामीण श्रोताओं को लक्ष्य बनाकर पूर्ण संचार सेवा विकसित और संप्रेषित करते हैं. हमारे विशेषज्ञता क्षेत्र के अंतर्गत गुणवत्तापूर्ण विषय वस्तु तैयार करने से लेकर उसे अपने ग्राहकों तक पहुंचाना शामिल होता हैजिनमें प्राइवेट कंपनियां और सरकारी निकाय शामिल होते हैं. यह सेवा श्रोताओं के लिए निशुल्क होती हैउन्हें अपने मोबाइल से (चाहे उनका हैंड किसी भी तरह का हो और वह इंटरनेट से जुड़ा हो या नहीं) केवल एक मिस कॉल (1800-12000-13 या 1800-120-1318) देने की आवश्यकता भर होती है. यह सेवा निम्नतम विशेषताओं वाले फोन पर भी काम करती हैं.

प्रश्न: आप अपने व्यापार का विज्ञापन कैसे करते हैं?

उत्तर: हमने ग्रामीण क्षेत्रों में कुछ विपणन गतिविधियां संचालित की थीं, जिससे हमें कुछ प्रारंभिक लोकप्रियता प्राप्त हुई. उसके बाद से हमारी सामग्री काफी मौखिक प्रचार सृजित करती है. हमारे पास बार-बार फोन करने वालों की संख्या बहुत बड़ी हैजो इस बात का प्रमाण है कि हमारी सामग्री कितनी प्रासंगिक होती है. हम कुछ ब्रैंड्स के साथ मिल कर बाजार प्रोत्साहन योजना भी तैयार करने की प्रक्रिया में हैं.

प्रश्न: आप अपनी सफलता का श्रेय किसे देना चाहेंगे?

उत्तर: हम जो भी करें उसके मूल में श्रोता होने चाहिएं. वह उनका ज्ञान बढ़ाने वाला हो और किसी न किसी रूप में उन्हें प्रभावित करने वाला हो.

प्रश्न: प्रतिष्ठान के प्रमुख के रूप में आपकी क्या जिम्मेदारियां हैं?

उत्तर: इसका जवाब देना सबसे कठिन है. आपको हमेशा सतर्क और तैयार रहना पड़ता है. हम दोनों इस मंच से संबंधित कोई भी काम और कोई भी निर्णय करने के लिए हमेशा तत्पर रहते हैं.

प्रश्न: आपको अपने व्यापार में किन चुनौतियों का सामना करना पड़ता है?

उत्तर: ब्रैंड्स को प्रयोग करने का विकल्प हमेशा खुला रखना चाहिए. ग्रामीण संचार संबंधी अधिकतर निर्णय बोर्ड रूम के सहकारी कार्यालयों में किए जाते हैं, जिनका ग्रामीण मनोविज्ञान से कोई संपर्क नहीं होता है. उनके लिए मीडिया योजना दूरदर्शन और आकाशवाणी से प्रारंभ होती है और उन्हीं तक समाप्त हो जाती है.

प्रश्न: स्टार्ट अप्स यानी अपना कारोबार शुरू करने की योजना बनाने वालों को आप क्या संदेश देना चाहेंगे?

उत्तर: आप जो भी करें, वह आपके जीवन में बदलाव लाने वाला होना चाहिए. दीर्घा अवधि में वही टिक पाते हैंजिनमें समस्याओं का समाधान करने की क्षमता है. इसके अलावाकिसी भी स्टार्ट अप की सफलता में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका टीम की होती है. अत: आप सबसे पहले अच्छी टीम बनाने का प्रयास करें.

प्रश्न: भारत में स्टार्ट अप्स की स्थिरता के बारे में आपका क्या ख्याल है?

 

उत्तर: किसी व्यक्ति के लिए अपना कारोबार प्रारंभ करने हेतु यह संभवत: सबसे उत्कृष्ट समय है. भारत बौद्धिक दृष्टि से महान और आबादी की दृष्टि से बड़ा राष्ट्र है. भारत जैसे विशाल आकार वाले और प्रतिष्ठित राष्ट्र के समक्ष समस्याएं हमेशा रहेंगी. नया उद्योग प्रारंभ करने वालों (स्टार्ट अप्स) का कार्य है कि वे मौजूदा व्यवस्था के सहयोग से उन समस्याओं का समाधान करें.

 

साभार: रोजगार समाचार से.

 

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