क्या है ये स्टार्टअप इंडिया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बड़े जोशो खरोश के साथ लाल किले के प्राचीर से 15 अगस्त, 2015 को “स्टैंड अप इंडिया, स्टार्ट अप इंडिया” कार्यक्रम की घोषणा की थी. सोलह एवं सत्रह जनवरी, 2016 को दो दिवसीय भव्य कार्यक्रम के साथ इस देशव्यापी कार्यक्रम को  लॉन्च किया गया. सरकार का यह कदम समय से पहले है या बाद यह तो समय ही बताएगा. लेकिन फिर भी आइये हम यहाँ इस कार्यक्रम को थोड़ा समझने का प्रयास करते हैं.

स्टार्टअप्स की यह बयार कोई आज की ही नहीं सूचना तकनीकि एवं सॉफ्टवेयर उद्योग में भारत के बढ़ते प्रभाव के साथ ही इस दौर का जन्म हो गया था. 1981 में इनफ़ोसिस के भारत में जन्म के साथ ही एक बात यह बात स्पष्ट हो गई थी कि व्यापार अथवा व्यवसाय जगत पर मात्र परम्परागत औद्योगिक घरानों का ही कब्ज़ा नहीं रहेगा. देखा जाय तो टाटा इस क्षेत्र में काफी पहले 1968 से ही कार्य कर रहे थे, टीसीएस की स्थापना तभी हुई थी. दरअसल, व्यापार जगत में समय से पहले और समय के बाद होने का कोई मतलब नहीं होता, व्यापार जगत में तो सिर्फ समय पर लगाये गए चौकों और छक्कों की ही कीमत होती है. 1981 के बाद आने वाले सालों में साइबरमीडिया, टैली और नैसकॉम जैसे संस्थानों की स्थापना हुई. इस बीच बहुत सी कम्पनियां बनीं बहुत सी बंद हुईं, डॉटकॉम का गुब्बारा फटा, लेकिन 2007-08 के आस पास उद्यमिता स्वरूपी इस उन्माद ने पुनर्वापसी की है और इस बार इसे “फोर्थ वेव” कहा जा रहा है. इस बार एशियाई और अफ्रीकी देशों में इस उन्माद की धमक है.

हम “स्टार्ट अप इंडिया” कार्यक्रम की समीक्षा फिर कभी कर लेंगे. आज हम यह जानने की कोशिश करते हैं कि यह सरकारी योजना क्या है और उससे एक स्टार्टअप या नवउद्यमी क्या पा सकता है? केंद्र सरकार ने सभी राज्य सरकारों को यह योजना लागू करने का आदेश दे दिए हैं.

“स्टार्ट अप इंडिया, स्टैंड अप इंडिया” कार्यक्रम की संकल्पना नव उद्यमिता अथवा स्टार्टअप को बढ़ावा देते हुए अधिकतम रोजगार सृजन लक्ष्य की प्राप्ति हेतु किया गया है. देश के वर्तमान जनसांख्यिकीय आंकड़ों पर एक दृष्टि डाली जाय तो पता चलता है कि देश में विद्यमान 65% जनसँख्या कार्य करने योग्य है. अतः इस कार्य करने योग्य जनसंख्या को रोजगार प्रदान करवाना सरकार का कार्य है. परम्परागत रीति से इतने बड़े जन समुदाय को रोजगार उपलब्ध करवाना शायद संभव नहीं होगा. इसीलिये मौजूदा सरकार इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए कुछ गैर परम्परागत नुस्खों को भी अपनाना चाहती है.

सरकार ने इस सत्य को स्वीकार है कि सूचना क्रांति के साथ सम्पूर्ण विश्व एक वैश्विक ग्राम में परिवर्तित हो चुका है और इस नई उभरती विश्व-व्यवस्था में भारतवर्ष एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है. सूचना तकनीकि के क्षेत्र में देश के गुणवत्ता पूर्ण मानव संसाधन ने पहले ही अपना डंका इस विश्व व्यवस्था में बजा रखा कार्यक्रम है. यदि इस उपलब्ध मानव संसाधन को भी कौशल उन्नयन के साथ उसी प्रकार गुणवत्ता पूर्ण मानव संसाधन में तब्दील कर लिया जाय, तो हमें इस विश्व व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बनने से कोई नहीं रोक सकता. पिछले कुछ वर्षों में नव उद्यमिता के क्षेत्र में भी हमने अपना लोहा मनवाया है और इसी नव उद्यमिता को लक्षित करते हुए सरकार रोजगार के प्रचुर अवसर पैदा करने का प्रयास कर रही है. यदि इस गैर परम्परागत तरीके को बढ़ावा देने में सरकार सफल होती है, तो न सिर्फ उद्यमिता को बढ़ावा मिलेगा बल्कि रोजगार के प्रचुर अवसर भी अवश्य पैदा होंगे.

आइये अब आसान भाषा में समझने की कोशिश करते हैं कि क्या है यह “स्टार्ट अप इंडिया स्टैंड अप इंडिया”?

स्टार्टअप इंडिया स्टैंड अप इंडिया कार्ययोजना

स्टार्ट अप इंडिया भारत सरकार की महत्वाकांक्षी पहल है, जिसके माध्यम से सरकार अभिनवशीलता (इन्नोवेशन) एवं स्टार्ट अप उद्यमशीलता (एंटरप्रेन्योरशिप) को बढ़ावा देते हुए आर्थिक प्रगति एवं बड़े स्तर पर रोजगार उत्त्पन्न करना चाहती है.

परिभाषा:

स्टार्ट अप को परिभाषित करते हुए इस संदर्भ में सरकार की अधिसूचना (नोटिफिकेशन) कहती है, “स्टार्ट अप वह उद्यम है जो अभिनवीकरण, प्रोद्योगिकी या बौद्धिक संपदा अधिकार (इंटेलएक्चुअल प्रॉपर्टी राईट) आधारित नए उत्पादों, प्रक्रियाओं अथवा सेवाओं के विकास, अनुप्रयोग (एप्लीकेशन) या वाणिज्यीकरण (कमर्शियलआईजेशन) से सम्बंधित कार्य कर रहा हो. पंजीकरण अथवा रजिस्ट्रेशन की तारीख से पांच वर्ष तक इसे इसे स्टार्ट अप माना जाएगा, यदि इन पांच वर्षों के किसी भी वित्त वर्ष में इसका कारोबार 25 करोड़ रुपयों से अधिक का नहीं हुआ.”

इकोसिस्टम

सरकार इस कार्यक्रम के माध्यम से स्टार्टअप इकोसिस्टम के सभी पहलुओं को प्रोत्साहित करने का प्रयास कर रही है. वह इस कार्यक्रम के द्वारा एक ऐसी कार्ययोजना का निर्माण करना चाह रही है जिससे कि यह नवउद्यमिता मिशन एक आन्दोलन का रूप ले ले. सरकार डिजिटल, प्रौद्योगिकी, कृषि, विनिर्माण, सामाजिक उद्यम, चिकित्सा, शिक्षा जैसे सभी क्षेत्रों में इस कार्ययोजना का कार्यान्वयन करना चाह रही है. मौजूदा टायर 1, 2, 3 शहरों के साथ अर्द्ध शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों तक इस कार्ययोजना को पहुँचाना सरकार का लक्ष्य है. सरकार सरल साथ (हैण्डहोल्डिंग), फंडिंग सपोर्ट एवं इंसेंटिव के साथ औद्योगिक एकेडेमिक साझीदारी तथा इन्क्यूबेशन को बढ़ावा देते हुए इन नवउद्यमिओं अथवा स्टार्टअप्स के लिए एक बेहतरीन पर्यावरण बनाना चाहती है, जिससे उद्यमिता का विकास को एवं रोजगार के अधिकतम अवसर पैदा हो सकें.

रेग्युलेटरी फेरबदल

स्टार्टअप इंडिया में रेग्युलेटरी दबाव कम करते हुए उद्यमिओं को उनके कोर विषय अर्थात व्यापार पर अधिक ध्यान देने का अवसर मुहैया कराया जा रहा है. स्वप्रमाणन अर्थात सेल्फसर्टिफिकेशन जैसी पहलों से समय की बरबादी को कम किया जा रहा है, जबकि उद्यमिओं के विशवास को बढ़ाया जा रहा है. उद्यम पंजीकरण की तिथी से तीन वर्षों तक उन्हें किसी भी इंस्पेक्शन से छूट प्रदान की जा रही है.

स्टार्टअप इंडिया हब

स्टार्टअप इंडिया हब की स्थापना की गई है जिससे स्टार्टअप से सम्बंधित सभी जानकारिओं एवं वित्त समाधान को एक ही स्थान पर प्राप्त किया जा सके. आज के माहौल में पहले से कहीं अधिक स्टार्टअप उद्यमशीलता के लिए आगे आ रहे हैं. सरकार की मंशा अब यही है कि इन स्टार्टअप्स को जानकारियाँ साझा करते हुए हर क्षेत्र में सहयोग प्रदान किया जाए जिससे उद्यमों को अधिकतम सफलता मिले और रोजगार के अधिकतम अवसर पैदा हो सकें.

विधिक सहयोग एवं फ़ास्ट ट्रैक पेटेंट मूल्यांकन

स्टार्टअप उद्यामिओं को बौद्धिक संपदा अधिकारों (इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स आई.पी.आर.) के प्रति जागरूक बनाते हुए उन्हें इसे अंगीकृत (अडॉप्ट) करने के लिए प्रेरित करना है. स्टार्ट अप्स को सुगमता के साथ आई.पी.आर. प्राप्त हो सके इसके लिए उन्हें उच्च श्रेणी की बौद्धिक संपदा सेवायें एवं संसाधन प्रदान करवाना भी इस कार्यक्रम का लक्ष्य है. उनके पेटेंट से सम्बंधित आवेदनों फ़ास्ट ट्रैक परीक्षण हेतु आगे बढ़ाना और उन्हें इस सेवा की फीस में अधिकतम छूट दिलवाना भी इस कार्यक्रम का लक्ष्य है.

आई.पी.आर. एक प्रमुख रणनीतिक अस्त्र के रूप में विश्व व्यापर व्यवस्था में विद्यमान है और उद्यमों के प्रतिस्पर्द्धी बने रहने के लिए यह बहुत आवश्यक हो गया है. स्टार्टअप्स जिनके पास सीमित संसाधन एवं मानव संसाधन उपलब्ध होते हैं, उन्हें इस प्रतिस्पर्द्धी व्यापारिक विश्व में बने रहने के लिए सतत विकास एवं विकास उन्मुख नवाचारों (इनोवेशनस) को अपनाना होगा और इसके लिए उन्हें अपने बौद्धिक संपदा अधिकारों की रक्षा करना सामान रूप से महत्वपूर्ण होगा. स्टार्टअप इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी प्रोटेक्शन (एस.आई.पी.पी.) स्कीम पेटेंट्स, ट्रेडमार्क्स एवं डिजाईन को सुगम ढंग से फाइल करने में मदद करेगी.

मोबाइल एप्लिकेशन (एप) और पोर्टल का निर्माण

स्टार्टअप इंडिया कार्यक्रम कार्यान्वयन को सुगम बनाने के लिए एक प्लेफोर्म की भी आवश्यकता थी, जहाँ स्टार्टअप्स सरकार एवं नियामक संस्थानों परस्पर सूचनाएं साझा कर सकें एवं विभिन्न हितधारकों से सहयोग ले सकें.

स्टार्टअप इकाई का संचालन प्रारंभ करने के लिए सम्बंधित नियामक प्रधिकारिओं (ऑथोरिटीज) के साथ पंजीकरण की आवश्यकता होती है. पंजीकरण प्रक्रिया में देरी अथवा स्पष्टता की कमी स्टार्टअप उद्यम की स्थापना एवं संचालन में भी देरी कर सकती है, जो कि सरकार बिलकुल नहीं चाहती है, अतः यह प्लेटफोर्म स्टार्टअप्स को उपलब्ध कराया गया. सरकार की बिलकुल सीधी सादी मंशा है कि इन स्टार्टअप्स को जितनी जल्दी हो सके उतनी जल्दी ऋण उपलब्ध कराया जाय, जिससे कि वे जल्द से जल्द मानव संसाधनों की भरती कर सकें, संचालन आरम्भ कर सकें एवं आय उत्त्पन्न कर सकें.

पब्लिक प्रोक्योरमेंट अथवा सार्वजानिक खरीद के लिए शिथलिकृत मानक

सार्वजानिक खरीद नीति के अंतर्गत स्टार्टअप्स शिथलिकृत (रिलैक्स्ड) मानक उपलब्ध कराये जायेंगे, गुणवत्ता के स्तर पर तो कोई समझौता नहीं किया जाएगा, लेकिन पूर्व अनुभव एवं कुल बिक्री (टर्नओवर) के मामले में उन्हें छूट प्रदान की जायेगी. जैसा कि आपको मालुम ही है कि सार्वजनिक खरीद नीति के अंतर्गत सभी सरकारी विभाग, मंत्रालय एवं सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के लिए 20% खरीद एम.एस.एम.ई. इकाईयों से करना अनिवार्य है.

इकाई बंद करने के लिए स्टार्टअप्स को फास्टर एग्जिट व्यवस्था

स्टार्टअप्स के लिए इकाई का संचालन बंद करना भी आसान किया गया है. नवाचार प्रकृति होने की वजह से स्टार्टअप्स का एक महत्वपूर्ण प्रतिशत असफल भी हो जाता है, अतः यह आवश्यक है कि उद्यम इकाई को स्थापित करना जितना आसान होना चाहिए, उतना ही आसान उसे बंद करना भी होना चाहिए अन्यथा लोग स्टार्टअप शुरू करने के लिए प्रेरित ही नहीं होंगे.

स्टार्टअप्स के लिए कार्पस फण्ड

नवाचार द्वारा संचालित उद्यमों के विकास एवं वृद्धि के लिए फण्डिंग सपोर्ट प्रदान करने लिए सरकार ने 2,500 करोड़ रुपयों का एक प्रारंभिक कोष बना रखा है और अगले चार वर्षों में इस फण्ड को 10,000 करोड़ रुपयों का कर दिया जाएगा. यह फण्ड, फंडों के फण्ड मॉडल पर बनाया गया है यह स्टार्ट अप्स को सीधे फण्डिंग न करते हुए, सेबी में रजिस्टर्ड वेंचर फंड्स की पूँजी के रूप में सहभागिता करेगा.

स्टार्ट अप्स के लिए क्रेडिट गारंटी फण्ड

समाज के प्रत्येक वर्ग से अभिनव उद्यमशीलता को उत्प्रेरित करने के लिए क्रडिट गारेंटी फण्ड फॉर स्टार्टअप्स का निर्माण किया गया है. स्टार्टअप उद्यमों की असफलता के पारम्परिक भारतीय भय को दूर करते हुए स्टार्टअप्स में प्रयोग को प्रोत्साहित करते हुए, जोखिम भरे व्यापारिक मॉडल्स को भी क्रेडिट गारेंटी द्वारा औपचारिक बैंकिंग प्रणाली में वेंचर ऋण के प्रवाह से मदद मिलेगी.

कर की छूट

स्टार्टअप्स को शुरू के तीन साल टैक्स से पूरी आजादी प्राप्त होगी एवं कैपिटल टैक्स गेन्स से भी एक्सेम्पटेड होंगे.

अन्य सहयोग

स्टार्टअप्स की मदद के लिए अटल इनोवेशन मिशन (ए.आई.एम.) के साथ सेल्फ एम्प्लॉयमेंट एंड टैलेंट यूटिलाइजेशन (एस.ई.टी.यू) प्रोग्राम लांच किया गया है. निजी क्षेत्र के विशेषज्ञों को इनक्यूबेटर सेटअप स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है. राष्ट्रीय स्तर के इनोवेशन संस्थानों के साथ मिलकर अधिक से अधिक इनोवेशन केन्द्रों की स्थापना के प्रयास किये जा रहे हैं. आई.आई.टी. मद्रास में स्थापित रिसर्च पार्क की तर्ज पर 7 नए रिसर्च पार्कों की स्थापना की जा रही है.

यह आर्टिकल स्टार्टअप इंडिया के सन्दर्भ में उपलब्ध सरकारी पोर्टल (http://startupindia.gov.in) पर उपलब्ध जानकारी एवं उपलब्ध डाक्यूमेंट्स के आधार पर लिखा गया है.

पुनःप्रकाशन: मयंक शर्मा द्वारा लिखा गया यह आर्टिकल पहले भी कई प्रकाशनों में प्रकाशित हो चुका है.

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